झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वार्ता केवल छात्रों के प्रतिनिधियों से ही होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत में किसी पत्रकार, वकील या अन्य व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाएगा।
‘छात्रों की बात, छात्रों के साथ’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनकी सरकार झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के व्यावहारिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रांची के साथ-साथ राज्य के सभी जिलों के छात्र-छात्राओं के सुझाव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सरकार सभी जिलों के विद्यार्थियों की राय लेकर व्यापक और समावेशी समाधान तैयार करेगी।सोरेन ने आगे कहा कि सरकार जल्द ही छात्रों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं से सुझाव लेकर समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधारों और सकारात्मक बदलावों की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
सरकार की शर्त के बाद छात्रों ने बनाया नया डेलिगेशन
सरकार की पहल के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने बातचीत के लिए नया प्रतिनिधिमंडल तैयार कर लिया है। इस छह सदस्यीय डेलिगेशन में केवल छात्र शामिल हैं। इसमें किसी पत्रकार या अधिवक्ता को जगह नहीं दी गई है। सूत्रों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र पासवान, राजेश प्रसाद, अंकित कुमार, कार्तिक सोरेन और आनंद कुमार शामिल हैं। जल्द ही इस सूची को आधिकारिक रूप से जारी कर झारखंड सरकार को सौंपा जाएगा।
विधानसभा मार्च के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी
इधर, रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विरोध में झारखंड विधानसभा की ओर मार्च कर रही AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक व्यक्ति ने स्याही फेंक दी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। घटना के बाद नेहा बोरा ने कहा, “20 जुलाई को हम पर आंसू गैस के गोले दागे गए, पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। जब हम तब नहीं डरे, तो यह मामूली स्याही हमारा क्या बिगाड़ सकती है।”
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी थी तबीयत
इससे पहले गुरुवार सुबह भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्होंने अपनी जान को खतरा होने की बात कही थी। डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। आंदोलन को लेकर छात्रों और सरकार के बीच अब संभावित वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं।