नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर दिए गए बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने एक वीडियो जारी कर अपने बयान की सफाई दी और कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। इसी विवाद पर अब कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर की ऐतिहासिक कथा का जिक्र करते हुए कहा कि इस विषय की गहराई को वही व्यक्ति समझ सकता है, जो चरित्र और सम्मान के महत्व को समझता हो।
‘जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण चरित्र है’
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि पद्मावती जैसी महिलाओं को पवित्र और सती माना जाता है। उनके मुताबिक, इन कथाओं से यह संदेश मिलता है कि इंसान के जीवन से भी अधिक महत्वपूर्ण उसका चरित्र और सम्मान हो सकता है। उन्होंने कहा कि चरित्र से जुड़ी ऐसी बातों की गहराई को समझना हर किसी के लिए आसान नहीं है। उनके मुताबिक, जो व्यक्ति स्वयं चरित्र के महत्व को समझता है, वही दूसरे के चरित्र और सम्मान की कद्र कर सकता है।
राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर भी साधा निशाना
अनिरुद्धाचार्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मनुस्मृति को लेकर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की सामाजिक निर्भरता के मुद्दे पर की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं से जुड़े दूसरे धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर राहुल गांधी क्यों नहीं बोलते। उन्होंने तीन तलाक, बुर्का और हलाला जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर ही ज्यादा सवाल उठाए जाते हैं।
‘राहुल गांधी को मनुस्मृति पढ़नी चाहिए’
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि राहुल गांधी को मनुस्मृति को विस्तार से पढ़ना चाहिए। उन्होंने नारी सम्मान से जुड़े प्रसिद्ध संस्कृत वाक्य ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ग्रंथ में केवल बुराई तलाशने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की नजर में केवल कमियां ही हों, तो उसे हर जगह बुराई दिखाई देगी। इसी संदर्भ में उन्होंने समाज में अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद होने की बात कही और लोगों से पहले आत्ममंथन करने की अपील की।
‘सनातन को टारगेट करने की कोशिश होती है’
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि दुनिया में हर तरह के लोग मौजूद हैं और किसी भी समाज या परंपरा में अच्छी और बुरी दोनों चीजें देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों का सनातन परंपरा से कोई संबंध नहीं है, वे भी इसे निशाना बनाकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने अपने बयान में लोगों को अपने भीतर झांकने और दूसरों की कमियां तलाशने से पहले आत्ममंथन करने की सलाह दी।
‘सनातन में नारी को देवी का दर्जा’
नारी सम्मान के मुद्दे पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में महिलाओं को देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने दुर्गा, सीता और राधा का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय धार्मिक परंपरा में देवी-देवताओं की पूजा साथ-साथ की जाती है। उन्होंने अन्य धर्मों के संदर्भ में भी तुलना करते हुए दावा किया कि महिलाओं को धार्मिक स्तर पर देवी का दर्जा देने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष रूप से दिखाई देती है।
‘मनुस्मृति समझ में नहीं आती तो उसमें क्यों घुस रहे हैं?’
मनुस्मृति को लेकर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि किसी भी धार्मिक ग्रंथ को समझने के लिए उसे पढ़ना जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मनुस्मृति की बातें समझ में नहीं आतीं, तो उसके आधार पर टिप्पणी करने से पहले उसे पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में जो बातें किसी व्यक्ति को अच्छी लगें, उन्हें अपनाया जा सकता है और जो उचित न लगें, उन्हें छोड़ने का निर्णय व्यक्ति स्वयं कर सकता है। उनके मुताबिक, किसी पर किसी धार्मिक विचार को जबरन थोपने की बात नहीं होनी चाहिए।