हरिद्वार। ‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर ने वरिष्ठ पत्रकार एवं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शान्तनु शुक्ला के सहयोग को भावुक शब्दों में याद किया। उन्होंने कहा कि फिल्म की यात्रा के दौरान शान्तनु शुक्ला एक मजबूत पिलर और बड़े भाई की तरह उनके साथ खड़े रहे और हर कदम पर उन्हें ताकत दी।
अनुप्रिया ने कहा कि शान्तनु शुक्ला के प्रयासों से उन्हें देश के अनेक बड़े साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनका मानना है कि संतों के इसी आशीर्वाद का प्रतिफल है कि हनुमान अंश दर्शकों का प्रेम पा रही है और सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है।
उन्होंने कहा कि उनके लिए संत समाज से मिला स्नेह और सम्मान किसी भी व्यावसायिक उपलब्धि से कहीं बड़ा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और कृष्ण जन्मभूमि न्यास से जुड़े संतों एवं पदाधिकारियों द्वारा मिला सम्मान उनके जीवन की बड़ी उपलब्धियों में है।
अनुप्रिया ने विशेष रूप से परम पूज्य गोविन्द देव गिरी जी महाराज के स्नेहपूर्ण शब्दों को याद करते हुए कहा, “गोविन्द गिरी जी महाराज ने मुझे ‘भारत की बेटी’ कहा। इससे बढ़कर मेरे लिए कोई सम्मान नहीं हो सकता।” उनके अनुसार, किसी संत के मुख से मिला ऐसा संबोधन केवल सम्मान नहीं, बल्कि आशीर्वाद और आत्मीयता का प्रतीक है।
‘कैलाशानंद गिरी जी महाराज में भगवान शिव के दर्शन हुए’
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए अनुप्रिया ने कहा कि उनसे पहली मुलाकात उनके लिए अविस्मरणीय रही।
उन्होंने कहा, “मुझे लगा जैसे नीम करौली बाबा ने ही मुझे उनके पास भेजा है। उनके दर्शन कर ऐसा लगा मानो भगवान शिव के साक्षात दर्शन हो गए हों।”
अनुप्रिया ने महाराज के जीवन पर फिल्म बनाने की इच्छा भी व्यक्त की थी। इस पर महाराज ने कहा कि देश में अनेक महान संत हैं, जिनके जीवन पर फिल्म बन सकती है और अभी उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। स्वयं वे साधना में लीन रहना चाहते हैं।
अनुप्रिया ने कहा कि महाराज का यह उत्तर उनके व्यक्तित्व की विराटता और साधना के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। प्रसिद्धि से दूर रहकर साधना को प्राथमिकता देना ही उनके संतत्व की सबसे बड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक सुख साधु-संतों के चरणों में ही है। यही कारण है कि हनुमान अंश के प्रदर्शन के बाद भी उनका संतों से जुड़ाव लगातार बना हुआ है। वह संतों के सान्निध्य में समय बिताकर उनके जीवन और विचारों को समझने का प्रयास कर रही हैं।
अनुप्रिया के लिए यह यात्रा केवल एक फिल्म की सफलता की यात्रा नहीं, बल्कि संतों के आशीर्वाद, आध्यात्मिक अनुभूति और अपनी सनातन जड़ों से जुड़ने की यात्रा बन गई है। इस यात्रा में शान्तनु शुक्ला का साथ उनके लिए एक ऐसे मजबूत संबल के रूप में सामने आया, जिसे वह आज भी एक बड़े भाई और मजबूत स्तंभ के रूप में याद करती हैं।