मध्य प्रदेश के बरगी बांध में हुए हादसे के दौरान जब चीख-पुकार मची हुई थी और क्रूज लहरों में समा रहा था, तब पास में काम कर रहे मजदूरों ने असाधारण बहादुरी दिखाई। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत पुल निर्माण में जुटे करीब 35 मजदूरों ने बिना समय गंवाए अपने औजार फेंके और किसी पेशेवर बचाव दल के आने का इंतजार किए बिना पानी में कूद पड़े।
इनमें पश्चिम बंगाल के 22 वर्षीय रमजान की बहादुरी सबसे अलग नजर आई। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने नाव को डूबते देखा, उन्होंने बिना सोचे-समझे अपने शरीर पर रस्सी बांधी और करीब 25 फीट ऊंची चट्टान से उफनते पानी में छलांग लगा दी। रमजान ने अकेले 6 लोगों को किनारे तक खींचा, जिनमें से 4 की जान बच गई।
बिहार के पश्चिम चंपारण के रहने वाले 28 वर्षीय बिंद्रा कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने नाव को रोकने के लिए आवाज भी लगाई थी, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इसके बाद मजदूरों ने मिलकर एक-दूसरे का हाथ पकड़ ‘मानव श्रृंखला’ बनाई और डूबते लोगों को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के राज कुमार (18) और शिवनाथ ने भी रस्सियों के सहारे कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनके पास न कोई जीवन रक्षक जैकेट थी और न ही कोई प्रशिक्षण, लेकिन लोगों की जान बचाने का जज्बा सबसे बड़ा था।
मजदूरों की इस साहसिक पहल को राज्य सरकार ने भी सराहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने वाले इन सभी बहादुर मजदूरों को 51-51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।