उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेयर सुषमा खर्कवाल और बीजेपी पार्षदों के बीच विकास फंड को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बीजेपी के एक दर्जन से अधिक पार्षदों ने मेयर पर विकास कार्यों के लिए फंड आवंटित नहीं करने का आरोप लगाया है। नाराज पार्षदों ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह से की है। वहीं, मेयर सुषमा खर्कवाल के भी राजनाथ सिंह से मुलाकात करने की जानकारी सामने आई है।
68.66 करोड़ के बजट को लेकर विवाद
दरअसल, लखनऊ नगर निगम में मई महीने में 68 करोड़ 66 लाख रुपये का बजट पास किया गया था। इसमें अवस्थापना निधि से 55 करोड़ 40 लाख रुपये और 15वें वित्त आयोग से करीब 13 करोड़ रुपये शामिल थे। पार्षदों को हर साल मिलने वाले नियमित विकास फंड से अलग इस बजट से नगर निगम के कुछ क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की गई। आरोप है कि इस बजट में समाजवादी पार्टी के 14 और बीजेपी के 45 पार्षदों के क्षेत्रों के लिए एक भी राशि आवंटित नहीं की गई। बीजेपी पार्षदों का कहना है कि उनके क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और फंड आवंटन में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसी को लेकर कुछ नाराज पार्षदों ने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक अपनी शिकायत पहुंचाई है।
मेयर ने आरोपों को बताया गलत
लखनऊ नगर निगम में कुल 110 निर्वाचित और 10 मनोनीत पार्षद हैं। इनमें से एक निर्वाचित पार्षद की मृत्यु हो चुकी है। मौजूदा निर्वाचित पार्षदों में बीजेपी के 84 पार्षद हैं। मेयर सुषमा खर्कवाल का कहना है कि विकास फंड का आवंटन जरूरत के आधार पर किया जाता है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने नाराज पार्षदों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग किसी के इशारे पर उनके खिलाफ गलत आरोप लगा रहे हैं।
विकास कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी
फंड आवंटन को लेकर पार्षदों की नाराजगी के बीच शहर में विकास कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। विपुल खंड जैसे पॉश इलाके में सड़कें खराब होने का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। खास बात यह है कि यहां की पार्षद भी बीजेपी से हैं, इसके बावजूद लंबे समय से सड़क निर्माण नहीं होने की शिकायत की जा रही है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं। ऐसे समय में लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण शहर में बीजेपी पार्षदों और मेयर के बीच सामने आया विवाद पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। अब नजर इस बात पर है कि राजनाथ सिंह से शिकायत के बाद पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और विकास फंड को लेकर नाराज पार्षदों की शिकायतों पर क्या फैसला लिया जाता है।