भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले में विश्वविद्यालय थानाक्षेत्र के परबत्ती मोहल्ले में मौजूद ऐतिहासिक बुढ़िया काली महारानी मंदिर पर असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया। जानकारी के अनुसार, रविवार की सुबह करीब तीन बजे असामाजिक तत्वों ने पथराव कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हालांकि, स्थानीय लोगों ने संयम से काम लिया।
पथराव की जानकारी मोहल्ले के लोगों को रविवार की सुबह तब लगी, जब लोग काली महारानी मंदिर मत्था टेकने पहुंचे। इस दौरान मौके पर महारानी की वेदी पर पांच-छह पत्थर के टुकड़े बिखरे मिले। मंदिर परिसर में भी कई पत्थर बिखरे मिले। दानपेटी और गेट के एक पल्ले को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया था। यह जानकारी मिलते ही परबत्ती मोहल्ले में आक्रोश फैलने लगा।
मंदिर परिसर से परंपरागत नगाड़ा बजा दिया गया। नगाड़े की आवाज सुनकर सभी घरों से लोग मंदिर परिसर पहुंचने लगे थे। मंदिर का नियम होने के कारण सभी जुटने लगे। स्थिति नाजुक होते देख घटना की जानकारी एक स्थानीय युवक ने तुरंत एसएसपी आनंद कुमार को दी। एसएसपी ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर सीआरपीएफ, दंगा नियंत्रण बल, स्थानीय पुलिस बल और तकनीकी सेल को भेजकर स्थिति नियंत्रण में कर ली।
परबत्ती के आक्रोशित लोगों ने पुलिस अधिकारियों की त्वरित पहल को देखते हुए संयम से काम लिया। परबत्ती निवासी कामेश्वर यादव ने भी लोगों से अपील कर कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से घरों में लौट जाएं। इसके बाद लोग घर लौट गए।
एसएसपी के निर्देश पर मंदिर परिसर में पथराव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध केस दर्ज करा दिया गया है। एहतियाती तौर पर सीआरपीएफ, दंगा नियंत्रण बल और पुलिस बलों को तैनात रखा गया है।
सीसीटीवी फुटेज से होगी पथराव करने वालों की पहचान
पुलिस की तकनीकी टीम ने मंदिर परिसर में पथराव की घटना में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। पुलिस की विशेष टीम सीसीटीवी की फुटेज से भी असामाजिक तत्वों की पहचान में जुट गई है। तकनीकी टीम डंप मोबाइल लोकेशन आदि का पता कर रही है।
ताजिया जुलूस के युवक करते थे चौकसी
परबत्ती इलाके में रहनेवाले लोगों का कहना है कि हर साल यहां से ताजिया जुलूस अखाड़े के निकलते समय जिस मोहल्ले का जुलूस निकलता था, उसके अखाड़े में शामिल युवक बुढ़िया काली महारानी मंदिर परिसर के पास चौकसी करते थे।
करीब दस की संख्या में युवक अपने हाथों की कड़ी बनाकर बैरिकेडिंग किया करते थे। ऐसी सुरक्षा मोहल्ले के प्रवेश मुहाने पर मौजूद चर्चित पहलवान रहे कामेश्वर यादव के आवास के आगे से गुजरते समय भी करते रहे हैं।
लोगों का कहना कि इस बार भी ताजिया जुलूस की कतार में अंतिम द्वितीय अखाड़ा साहेबगंज मोहल्ले का था। उस अखाड़े में शामिल युवकों ने सुरक्षा चौकसी की उस परंपरा को कायम रखा था। उन्होंने मंदिर परिसर और कामेश्वर यादव के आवास के समीप सुरक्षा बैरिकेडिंग बना रखी थी। स्थानीय लोग उसके बाद घरों में चले गए थे। अंतिम ताजिया जुलूस अखाड़ा मुर्गियाचक का था।