मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार तेजी से विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है और अब राज्य की पहचान पिछड़ेपन से नहीं, बल्कि प्रगति, निवेश और बेहतर बुनियादी ढांचे से हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार’ के विजन को साकार करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
‘कोसी अब अभिशाप नहीं, नए बिहार की पहचान’
सम्राट चौधरी ने कहा कि नेपाल से आने वाली नदियां, विशेषकर कोसी नदी, लंबे समय तक बिहार के लिए बड़ी चुनौती रही हैं। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में बनने वाले बिहार भवन का नाम ‘कोसी’ रखने का आग्रह किया है, क्योंकि अब यह नदी नए बिहार के आत्मविश्वास और बदलाव का प्रतीक बन चुकी है।
बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास में अलग-अलग नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह ने औद्योगिक विकास की नींव रखी, कर्पूरी ठाकुर ने सामाजिक न्याय को मजबूती दी और नीतीश कुमार ने राज्य के बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास को नई दिशा दी। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ वर्षों तक बिहार विकास की दौड़ में पीछे रहा, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
उन्होंने कहा कि आज राज्य के लगभग हर गांव तक सड़क और बिजली पहुंच चुकी है। पहले जहां जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में पैदल चलकर पहुंचना पड़ता था, वहीं अब बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण सड़क और बिजली उपलब्ध कराने के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली और बिजली पर हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी भी दे रही है।
‘सहयोग कार्यक्रम’ से आसान हुआ समाधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि आम लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने ‘सहयोग कार्यक्रम’ शुरू किया है। इसके तहत आवेदन मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा में अधिकारियों को कार्रवाई करनी होती है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) करता है। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं और प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ी है।
अब शिक्षा और उद्योग पर सरकार का फोकस
सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई गति देना है। इसके लिए राज्य में नए डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं, निजी विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और बड़े औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य देश की तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।