पंजाब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कुछ महीने पहले राज्य की सिंचाई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मालवा नहर परियोजना का ऐलान किया था। यह परियोजना न केवल राज्य के कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा प्रदान करेगी, बल्कि यह पंजाब के दक्षिणी इलाकों के लिए अभूतपूर्व विकास का अवसर भी पैदा करेगी। मालवा नहर का निर्माण राज्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली सिंचाई समस्याओं का भी समाधान होगा। इस नहर के बनने से करीब 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचित किया जा सकेगा, जिससे किसानों को पानी की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी और उनकी फसलें सुरक्षित रहेंगी।
मालवा नहर का निर्माण हरिके हेडवर्क्स से राजस्थान फीडर नहर के बायीं ओर स्थित इसके हेडवर्क्स से गांव वारिंग खेड़ा तक किया जाएगा। यह नहर 149.53 किलोमीटर लंबी होगी, और इसकी क्षमता 2000 क्यूसेक पानी की होगी। इस परियोजना पर लगभग 2300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस नहर का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पंजाब के मालवा क्षेत्र में जल आपूर्ति की समस्याओं को हल करना है, जो वर्षों से सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। मालवा क्षेत्र, जिसमें मुक्तसर, गिद्दड़बाहा, बठिंडा, जीरा और अबोहर जैसे इलाके शामिल हैं, अब पानी की कमी से जूझने की स्थिति से बाहर निकलेंगे। इससे न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा था कि यह नहर राज्य के इतिहास में पहली बार बनाई जा रही है, और इससे मालवा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले ही सोचा था। भगवंत मान ने इस परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि पिछली सरकारों के समय में इस मुद्दे की अनदेखी की गई थी, जिसके कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ और कई इलाकों में जल संकट गहरा गया। मालवा नहर का निर्माण पंजाब के पानी के संकट को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे आने वाले समय में राज्य के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी।