सुपौल: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को अपने कार्यकाल में पहली बार सुपौल पहुंचे। हवाई मार्ग से छातापुर प्रखंड की बलुआ पंचायत पहुंचे मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की पुण्यतिथि कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इससे पहले उन्होंने डॉ. मिश्र के पैतृक मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद मुख्यमंत्री चैनपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने निर्माणाधीन कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली। हालांकि, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र की प्रतिमा की ओर मुख्यमंत्री का रुख नहीं होने को लेकर कुछ स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
जगन्नाथ मिश्र की प्रतिमा का किया अनावरण
बलुआ पंचायत के वार्ड नंबर-4 में आयोजित कार्यक्रम में सीएम सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान डिप्टी सीएम विजय चौधरी, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, विधायक नीरज कुमार बबलू, रामविलास कामत और सोनम रानी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
कोसी-मेची परियोजना का किया निरीक्षण
डॉ. जगन्नाथ मिश्र की पुण्यतिथि कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने चैनपुर में कोसी-मेची रिवर लिंक परियोजना का जायजा लिया। परियोजना के कैंप कार्यालय में समीक्षा बैठक भी हुई, जहां जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह और डीएम सावन कुमार ने प्रेजेंटेशन के जरिए निर्माण कार्य और परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने परियोजना को सीमांचल और बिहार के लिए ऐतिहासिक एवं बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इसके पूरा होने से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
2.14 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को मिलेगा लाभ
परियोजना पूरी होने के बाद करीब 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त और सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। योजना के तहत बाढ़ के दौरान कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को लिंक नहर के जरिए मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे महानंदा बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और कोसी के बाढ़ प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना से:
- अररिया: 69,642 हेक्टेयर
- पूर्णिया: 69,970 हेक्टेयर
- किशनगंज: 39,548 हेक्टेयर
- कटिहार: 35,653 हेक्टेयर
कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
6,282 करोड़ रुपये की परियोजना, मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता को 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाएगा। इसके अलावा चार शाखा नहरें, छह वितरणियां और अन्य जरूरी नहर प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अंतिम छोर पर करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में पहुंचाने की योजना है। परियोजना की अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘निर्माण के दौरान किसानों को न हो परेशानी’
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के निर्माण के दौरान किसानों को खेती-किसानी में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी के साथ गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने को कहा। सीएम ने परियोजना से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने और बांध व अन्य जल संरचनाओं के जरिए छोटी नदियों में भी सालभर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।