लखनऊ। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सोनल मैनेजमेंट (एनआईपीएम) उत्तर प्रदेश चैप्टर की वार्षिक आम बैठक 28 जून को होटल, गोमती, लखनऊ में मानव संसाधन क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केएमसी भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. अजय तनेजा थे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II, लखनऊ आशीष कुमार, एनआईपीएम उत्तर प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष डा. विनोद कुमार यादव, कोषाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र कुमार गुप्ता तथा मानद सचिव डॉ. विष्णु प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रो. अजय तनेजा ने कर्मचारियों के समग्र विकास पर बल देते हुए कहा कि व्यक्तिगत विकास को संगठन के मूल्यों के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व कर्मचारियों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पहचाना जाता है।
उन्होंने कहा कि पहले कर्मचारी अपना पूरा कार्यकाल एक ही संस्था में बिताते थे, जबकि आज का कर्मचारी संगठन में अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास को अधिक महत्व देता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मानव संसाधन प्रबंधन में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज संस्थानों में एआई आधारित चैटबॉट्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन एआई मानव संसाधन की भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सहानुभूति और मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकता। आशीष कुमार ने कर्मचारी भविष्य निधि को लेकर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। साथ ही उपस्थित लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
इससे पहले डॉ. विष्णु प्रताप सिंह ने संस्था के वार्षिक कार्यों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। डॉ. विनोद कुमार यादव ने कहा कि एनआईपीएम मानव संसाधन से जुड़े प्रबंधकों की क्षमता को बढ़ाने का कार्य कर रहा है। डॉ. गजेंद्र कुमार गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।
बैठक का समापन मानव संसाधन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा कर्मचारी-केंद्रित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।