प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में केंद्र द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद किए जाने के बाद भी राज्य सरकार ने सुधार की दिशा में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार लगातार कड़े आर्थिक फैसले ले रही है।
इसी बीच एक सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश की जनता इन फैसलों के समर्थन में खड़ी नजर आ रही है। ‘दिव्य हिमाचल’ के साप्ताहिक सर्वे में पूछे गए सवाल—‘क्या सरकार को और सख्त आर्थिक फैसले लेने चाहिए?’—पर 77 प्रतिशत लोगों ने समर्थन में जवाब दिया। वहीं 16 प्रतिशत लोगों ने असहमति जताई, जबकि 7 प्रतिशत लोगों ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख फैसलों में बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों से कैबिनेट रैंक वापस लेना शामिल है। इसके अलावा अफसरों के वेतन और भत्तों में 20 प्रतिशत कटौती की गई है, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों का वेतन डिफर किया गया है। राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए पेट्रोल-डीजल पर वैट और वाहनों के एंट्री टैक्स में भी बढ़ोतरी की है, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोगों ने सरकार के फैसलों को राज्य के हित में बताया, वहीं कुछ ने कहा कि सख्ती आम जनता पर ज्यादा पड़ रही है। कई लोगों ने सुझाव दिया कि विधायकों को एक ही पेंशन दी जानी चाहिए, ताकि वित्तीय बोझ कम किया जा सके। कुल मिलाकर, आर्थिक संकट के इस दौर में सख्त फैसलों को लेकर हिमाचल प्रदेश की जनता का बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।