अमेठी। मुंशीगंज स्थित इंदिरा गांधी स्कूल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग में जीएनएम तृतीय वर्ष की छात्रा दीप्ति यादव (22) की रक्षाबंधन के दिन संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शनिवार शाम सुल्तानपुर के बल्दीराय थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव सादुल्लापुर में शव का अंतिम संस्कार किया गया। मामले में परिजनों की तहरीर पर अमेठी पुलिस ने कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश एस. और वार्डन नेहा शुक्ला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
परिजनों के मुताबिक, 28 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे दीप्ति ने अपनी मां सुनीता यादव से फोन पर बात की थी। उसने रक्षाबंधन के मौके पर छोटी बहन से भाई को अपनी ओर से राखी बंधवाने और नेग के पैसे संभालकर रखने की बात कही थी। दीप्ति ने मां से कहा था कि वह बाद में आकर पैसे ले लेगी। इसके करीब दो घंटे बाद दोपहर 1:06 बजे वार्डन के मोबाइल से परिजनों को फोन आया कि दीप्ति की हालत गंभीर है और उन्हें तत्काल कॉलेज पहुंचने को कहा गया। परिजनों के अनुसार, रास्ते में 1:29 बजे दोबारा फोन कर उन्हें सीधे मुंशीगंज थाने आने के लिए कहा गया।
दोपहर करीब 2:30 बजे जब परिजन कॉलेज पहुंचे तो वार्डन ने उन्हें बताया कि दीप्ति ने फांसी लगा ली है और पुलिस शव को ले जा चुकी है। परिजनों ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिस कमरे में फांसी लगाने की बात कही गई, उसके दरवाजे, सिटकिनी या लॉक पर किसी तरह के टूटने के निशान नहीं थे।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
दीप्ति की मां सुनीता यादव ने पुलिस को दी तहरीर में कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि प्रधानाचार्य और वार्डन ने परिजनों को शव दिखाए बिना तथा कथित तौर पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना शव पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
सुनीता यादव और उनके पति कुंवरबख्श यादव दोनों दिव्यांग हैं। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और हॉस्टल एवं कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्रधानाचार्य और वार्डन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। छात्रा की मौत के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियों का पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।