अयोध्या| अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनूप अवस्थी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में चीफ जस्टिस से अपील की गई है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जाए। साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राम मंदिर देशभर के लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस बीच राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ बीजेपी नेता विनय कटियार ने भी पूरे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आस्था के केंद्र में ही वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने लगें तो इससे श्रद्धालुओं का भरोसा प्रभावित होगा। विनय कटियार ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कटियार ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
दरअसल, यह विवाद तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाया। हालांकि अब तक आधिकारिक तौर पर किसी रकम की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन करीब 7 करोड़ रुपये की हेराफेरी का दावा किया गया है। मामले को और तूल तब मिला जब राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महीपाल सिंह ने भी दान राशि में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका दावा है कि शिकायत करने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और पुराने सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए।
वहीं, अयोध्या पुलिस ने जांच के दौरान मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक यह रकम गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी। मामले की जांच अब तेज कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पूरे विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत को जांच टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसआईटी को शुरुआती रिपोर्ट सात दिन में और विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।