पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर सहमति बन गई है। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोलने का फैसला लिया गया है।
इस घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। खासतौर पर भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने के साथ-साथ माल ढुलाई की लागत में भी कमी आ सकती है।
ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों—सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर—से होने वाला तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर करता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर इन देशों से आयात करता है।
बीते महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और शिपिंग लागत भी बढ़ गई थी। कई देशों को तेल और एलएनजी सप्लाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अब युद्धविराम और समुद्री मार्ग खुलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि तेल आपूर्ति फिर से सामान्य होगी। इससे भारत के लिए आयात लागत कम हो सकती है और पेट्रोल-डीजल समेत अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा सुचारु रूप से खुलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी राहत मिलेगी। समुद्री माल ढुलाई का खर्च घटने से भारत के आयात-निर्यात सेक्टर को फायदा पहुंच सकता है। साथ ही महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी यह घटनाक्रम मददगार साबित हो सकता है।