संसद के बजट सत्र में विपक्ष ने दो बड़े कदम उठाने की तैयारी कर ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके साथ ही इस हफ्ते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस देने की योजना भी बनाई गई है। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है।
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों ने पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं। विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने नहीं दिया। कांग्रेस सांसद आज सदन में प्रस्ताव पेश करेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें सदन से अनुमति (लीव ऑफ द हाउस) लेनी होगी।
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजीजू इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करेंगे। बीजेपी की ओर से अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब अपनी बात रखेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के चिराग पासवान भी सदन को संबोधित करेंगे। कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर के खिलाफ तर्क पेश करेंगे।
वहीं, विपक्ष पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस देने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक नोटिस का मसौदा तैयार है और इसे इस हफ्ते जमा कर दिया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद ने कहा कि यह “100 प्रतिशत टीम वर्क” है और सभी विचारधारा वाले दलों ने मिलकर ड्राफ्ट और प्लानिंग की है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त जिस महान पद पर हैं, उसकी गरिमा को उन्होंने गिरा दिया है।
विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के सभी दल इस योजना में शामिल हैं। नोटिस सामूहिक रूप से तैयार किया गया है और अब दोनों सदनों के सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। नियम के मुताबिक लोकसभा से कम से कम 100 और राज्यसभा से 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को हटाने जैसी होती है और केवल ‘साबित दुराचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही संभव है। इसे किसी भी सदन में लाया जा सकता है और पास होने के लिए कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वालों का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा कि यदि विपक्ष CEC के खिलाफ महाभियोग लाता है, तो वे इसका समर्थन करेंगी। फिलहाल ममता बनर्जी राज्य में SIR के दौरान नाम कटने के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना पर हैं। संसद के बचे दिनों में इन प्रस्तावों पर विपक्ष का एकजुट रुख सत्र को गरमा-गरम बना रहा है।