बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब नितिन नवीन ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट से अपना त्यागपत्र सौंपा। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए नितिन नवीन ने संसद के उच्च सदन में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले बांकीपुर की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता का स्नेह और समर्थन उनके लिए अमूल्य रहा है। नियमों के अनुसार, किसी भी सदस्य को दूसरे सदन के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर अपने मौजूदा पद से इस्तीफा देना होता है। 16 मार्च को हुए चुनाव में नितिन नवीन के साथ नीतीश कुमार, शिवेश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। 30 मार्च को 14 दिन की समयसीमा पूरी होने के साथ ही नितिन नवीन ने अपना इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के साथ उन्होंने एक भावुक संदेश भी साझा किया। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में अपने पिता और वरिष्ठ नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने पटना पश्चिम से उपचुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। पिछले दो दशकों में उन्होंने बांकीपुर की जनता को अपने परिवार की तरह माना और लगातार पांच बार विधायक चुने जाने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
वहीं, राज्य की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने आखिरी बार 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ा था और उसके बाद से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे। अब उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है।