पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक बार फिर सियासी गरमाहट के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद की वजह बने हैं यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा, जिनकी तैनाती के बाद चुनावी माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण नजर आ रहा है। केंद्र सरकार ने अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद से ही कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उनकी सख्त कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत विपक्षी दलों ने उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि उनकी मौजूदगी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है, जहां याचिका दाखिल कर उन्हें तुरंत हटाने की मांग की गई है। साथ ही, जल्द सुनवाई की अपील भी की गई है। बता दें कि अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश में अपनी तैनाती के दौरान कई बड़े ऑपरेशनों का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी छवि एक सख्त अधिकारी की मानी जाती है।
29 अप्रैल को राज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है, जबकि 4 मई को पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। ऐसे अहम वक्त में यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा रहा है।
याचिका में क्या आरोप?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि अजय पाल शर्मा अपनी जिम्मेदारियों का निष्पक्ष तरीके से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी कार्यशैली नियमों के विपरीत है और वे उम्मीदवारों तथा मतदाताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया है कि भाजपा चुनाव में बढ़त बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।