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वृंदावन वाले ओंकार दास जी के साथ पत्रकार अंकित कुमार गोयल के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)

आपने अपने करियर की कैसे शुरुआत की और परिवार का कितना सहयोग मिला?

हमने अपने जीवन की शुरुआत गुरुजनों के आचरण एवं श्री रामचरितमानस का पाठ स्वाध्याय आदि के आधार पर किया l इसमें परिवार का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ l

वृंदावन में दीक्षा के समय गुरु ने जो पहला मंत्र या उपदेश दिया, क्या वो आज भी आपकी हर कथा से पहले कानों में गूंजता है? वो क्या था?

श्री धाम वृंदावन में गुरु दीक्षा के समय सदगुरुदेव भगवान द्वारा जो पहला उपदेश था वह यह की गुरु के द्वारा बताएं इस मार्ग पर सतत अग्रसर होते हुए अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना l एवं अपने आचार्य परंपरा को हमेशा स्मरण रखना एवं पूर्वाचायों को नमन करना जो कि निम्न श्लोक में स्पष्ट है:-

श्री सीता नाथ समारम्भा श्री रामानन्दार्य माध्यमाम् l
असमादाचार्यंपर्यंता वन्दे श्री गुरु परम्पराम् ll

आपके परदादा हनुमान प्रसाद जी के समय की भक्ति और आज की YouTube-Reels वाली भक्ति में सबसे बड़ा अंतर आप क्या देखते हैं? क्या कुछ खो रहा है?

हमारे पूज्य पर दादा स्व० श्री हनुमान प्रसाद तिवारी जी के समय की भक्ति और आज की Youtube Reels वाली भक्ति में सबसे बड़ा अंतर यह है कि उन दिनों की भक्ति में पूरी सच्चाई होती थी और आज कल की भक्ति में दिखावटी ज्यादा और सच्चाई अल्प होती है ।

भागवत कथा कहते समय कोई एक क्षण ऐसा आया जब श्रोता रो पड़े और आप खुद मंच पर स्तब्ध रह गए? वो कौन-सा प्रसंग था?

भागवत कथा कहते समय कई ऐसे प्रसंग आते हैं जिस समय सभी श्रोताओं की आंखें नम हो जाती हैं और हमारी वाणी भी अवरुद्ध हो जाती है। जैसे उद्धव गोपी संवाद, एवं सुदामा जी का चरित्र आदि।

प्रेमानंद जी महाराज और मलूक पीठाधीश्वर जी से मिलकर आपको जीवन का जो सबसे अप्रत्याशित सबक मिला, वो क्या था जो किताबों में नहीं मिलता?

परम पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज एवं पूज्य मलूक पीठाधीश्वर जी से मिलकर हमें यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि मानव जीवन का लक्ष्य केवल भगवान की भक्ति है। न कि संसार में फंसकर अपने जीवन को यूं ही नष्ट करना

अगर गोस्वामी तुलसीदास आज रीवा या वृंदावन आएं, तो आप उन्हें 2026 की दुनिया की कौन-सी 1 समस्या सुनाकर समाधान पूछेंगे?

अगर हमें वर्तमान में इस धरा धाम पर पूज्य संत गोस्वामी तुलसीदास जी का साक्षात्कार हो तो हम उनके चरणों में यही प्रार्थना करेंगे की ‘प्रभु किस साधन से जीव संसार को भूलकर पूर्ण रूपेण भक्ति मार्ग में चल पड़े। और भक्ति प्राप्त कर संपूर्ण जीवन सार्थक करें।

 

देवउठनी एकादशी को भागवत सप्ताह के बीच दीक्षा होना संयोग था या कोई दिव्य संकेत? उस दिन वृंदावन में ऐसा क्या घटा जो आप कभी नहीं भूलते?

देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर दास को जी दिव्य वस्तु की प्राप्ति हुई वह केवल संयोग नहीं बल्कि दिव्या संकेत था क्योंकि दीक्षा संस्कार का अर्थ है-दुबारा जन्म जो कि हमें देवउठनी एकादशी के दिन प्राप्त हुआ। उस शुभ अवसर पर कई चीजे दिव्याती दिव्य थी जैसे:-कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष, भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का सत्र, सदगुरुदेव साक्षात्कार, ऐसी मंगल में उपस्थिति में श्रीधाम वृंदावन के मूर्धन्य विद्वान, भागवत मर्मज्ञ, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य सदगुरुदेव श्री डॉ श्याम सुंदर पाराशर जी का दासत्व प्राप्त हुआ जो की दास के लिए अमूल्य निधि है। इसी पवन समय से दास ने वैष्णव धर्म के पालन का शुभारंभ किया,जैसे नित्य नियम मंत्र राज का जाप, एकादशी व्रत आदि। जिसकी तिथि-08/11/2019 थी। उसे दिन ऐसा अनुभव हुआ कि भगवान श्री हरि ने उठते ही दास के कल्याण के लिए ही सारे मंगलो का मंगल में विधान किया। अतः दास का जीवन मंगलमय में भगवत कृपा से होगा ।

छोटे भाई-बहन जब आपके भक्ति मार्ग में सहयोग करते हैं, तो क्या कभी उन्होंने ऐसा सवाल पूछ लिया जिसने खुद आपके गुरु-ज्ञान को चुनौती दे दी हो?

छोटे भाई बहन भक्ति विषयक प्रश्न पूछते रहते हैं। जैसे, भगवान जल्दी कैसे प्रसन्न होते हैं। जीते जी मनुष्य मुक्ति कैसे प्राप्त करें,आदि-आदि। मैं भी भागवत जी के अनुसार प्राप्त ज्ञान के माध्यम से उन्हें संतुष्ट करता हूंँ।

सोशल मीडिया के दौर में जब हर दूसरा व्यक्ति ‘कथा वाचक’ बन रहा है, तो एक सच्चे भागवत व्यास की पहचान श्रोता कैसे करें? 3 लाल झंडे बताइए।

सोशल मीडिया के दौर में कथा वाचकों की भीड़ है फिर भी सच्चे भागवत व्यास की पहचान तो उसके कथा वाचन शैली, श्लोकों का उच्चारण, कथा करने के उद्देश्य आदि माध्यमों से आसानी से हो जाती है । कथावाचक को श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, भक्ति विषयक कथा, एवं आधिकारिक कथा कहनी चाहिए। मूल ग्रंथ को आधार मानकर पूरी सावधानी से कथा वाचन करना चाहिए।

नीचे तीन झंडे दिए गए हैं:-

{1} श्लोकों को अशुद्ध पढ़ना
{2} मूल कथा से हट जाना
{3} कथा में व्यर्थ की बातों की चर्चा करना

आपके पिता जी ने आपको भागवत से जोड़ा। अगर आपको अपने होने वाले पुत्र/शिष्य को सिर्फ 1 श्लोक देकर जाना हो, तो वो कौन-सा होगा और क्यों?

हम अपने पुत्रों अथवा शिष्यों को धरोहर के रूप में भागवत जी का अंतिम श्लोक ही देकर जाना चाहेंगे जो की संपूर्ण भागवत जी का निष्कर्ष है। जो निम्नलिखित है:-

नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम् l
प्रणामो दुःख सामनस्तंनमामि हरिं परम् ll

जिसका अर्थ यह है कि”मैं उन सर्वोच्च भगवान हरि को सादर प्रणाम करता हूँ, जिनके पवित्र नामों का सामूहिक जप (संकीर्तन) सभी पापों का नाश कर देता है और जिन्हें प्रणाम करने से मनुष्य के सभी भौतिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं। मृत्यु के बाद आप चाहते हैं लोग आपको ‘कथावाचक’ कहकर याद करें, ‘वृंदावन के दास’ कहकर, या ‘ओंकार’ कहकर? इन तीनों में आपके लिए सबसे बड़ा सम्मान कौन-सा है?मृत्यु के बाद मैं कथा वाचक के रूप में स्मरण किया जाऊं यह हमारी मनोकामना है।

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