रांची: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर मंथन जारी है। राज्यसभा की दो सीटों में से एक पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने उम्मीदवार उतारने का फैसला कर लिया है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस ने अपनी दावेदारी पेश की है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस नेताओं से दो से तीन दिन का समय मांगा है।
कांग्रेस नेताओं ने की हेमंत सोरेन से मुलाकात
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने दूसरी सीट पर पार्टी की दावेदारी रखते हुए कहा कि यदि गठबंधन एकजुट रहा तो दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कुछ समय की मांग की है।
कांग्रेस के सामने आंकड़ों की चुनौती
झारखंड विधानसभा में जेएमएम के 34 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होगी। ऐसे में जेएमएम अपने उम्मीदवार को जिताने के बाद 6 अतिरिक्त वोट बचा सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। यदि कांग्रेस को जेएमएम के 6 अतिरिक्त वोट मिलते हैं, तो उसकी संख्या 22 तक पहुंचती है। ऐसे में जीत के लिए उसे 6 और वोटों की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 और भाकपा-माले के 2 विधायकों का समर्थन अहम माना जा रहा है।
सिर्फ जेएमएम के समर्थन से नहीं बनेगी बात
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस नेताओं को यह भी बताया कि केवल जेएमएम के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित नहीं होगी। दूसरी सीट जीतने के लिए गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों, खासकर राजद और माले का समर्थन भी जरूरी है।
दावेदारों की सूची में कई नाम
राज्यसभा के पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू और प्रदीप बलमुचू ने खुद को इस चुनावी दौड़ से अलग कर लिया है। दोनों नेताओं ने अपनी इच्छा से पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी है। प्रदीप बलमुचू ने आशंका जताई कि यदि उन्हें उम्मीदवार बनाया गया तो क्रॉस वोटिंग की स्थिति बन सकती है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी राज्यसभा सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
राजद को तेजस्वी यादव के संकेत का इंतजार
दूसरी ओर राजद के चार विधायकों की भूमिका भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी विधायक अंतिम फैसला लेने से पहले राजद नेता Tejashwi Yadav के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। राजद कोटे से झारखंड सरकार में मंत्री Sanjay Prasad Yadav ने कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। राज्यसभा चुनाव में दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस की दावेदारी और सहयोगी दलों की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री Hemant Soren का फैसला और गठबंधन सहयोगियों का रुख यह तय करेगा कि दूसरी सीट पर उम्मीदवार कौन होगा और जीत का गणित कैसे बनेगा।