अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर दिए गए अपने बयान पर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और यह टिप्पणी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के संदर्भ में की गई थी। सतीश महाना ने कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते थे और बाबरी मस्जिद के पक्ष में खड़े थे, वही अब मंदिर में दिए गए चंदे को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका पैसा वापस किया जाए, तब मैंने कहा था कि शायद उन्होंने श्रद्धा से दान नहीं दिया होगा। अगर कोई भगवान को सच्ची आस्था से दान देता है, तो वह उसे वापस नहीं मांगता। मैंने भी श्रद्धा से दान दिया था और मेरा विश्वास है कि मेरा योगदान मंदिर निर्माण में लगा है।”
‘चोरी करने वालों पर हो सख्त कार्रवाई’
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सतीश महाना ने कहा कि यदि किसी ने चोरी की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “सरकार और मंदिर ट्रस्ट इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं। चाहे दोषी किसी भी स्तर का व्यक्ति हो, कानून के अनुसार उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में दान की गई वस्तु या धनराशि वापस मांगने की परंपरा नहीं रही है। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति वास्तव में अपना दान वापस मांग रहा है, तो यह उसकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है।
विपक्ष ने जारी रखी आलोचना
सतीश महाना के बयान को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता आशुतोष वर्मा ने इसे “बेहद बेतुका” करार दिया, जबकि कांग्रेस ने भी विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणी की आलोचना की। कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जिम्मेदार लोग विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कथित चोरी से करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था प्रभावित हुई है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या लोगों की श्रद्धा मापने के लिए कोई जीपीएस लगा हुआ था? गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच फिलहाल विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।