तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कृष्णानगर की अदालत ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया है। मामला भारतीय सेना और अन्य संवेदनशील मुद्दों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा बताया जा रहा है। अदालत के मुताबिक, बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद महुआ मोइत्रा सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुईं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
कोर्ट में पेश नहीं होने पर जारी हुआ वारंट
मामले के अनुसार, एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीय सेना के जवानों, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा धार्मिक प्रतीकों को लेकर कथित विवादित टिप्पणियों के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद कृष्णानगर की ACJM अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई के लिए महुआ मोइत्रा को कई बार व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, उनके अदालत में उपस्थित नहीं होने के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
तुलसी माला और हिजाब पर टिप्पणी का भी आरोप
महुआ मोइत्रा पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय सेना और गृह मंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के अलावा हिंदुओं की तुलसी माला और मुस्लिम समुदाय के हिजाब को लेकर भी विवादित टिप्पणी करने का आरोप है। इसी सिलसिले में 12 जून 2026 को अदालत में मामला दायर किए जाने की बात कही गई है। शिकायत के बाद अदालत की ओर से कई बार समन भेजे गए, लेकिन महुआ के पेश नहीं होने पर कोर्ट ने अब सख्त कदम उठाया है।
कौन हैं महुआ मोइत्रा?
महुआ मोइत्रा TMC की चर्चित और मुखर नेताओं में शामिल हैं। राजनीति में आने से पहले वह इन्वेस्टमेंट बैंकर के तौर पर काम करती थीं। उन्होंने जेपी मॉर्गन की लंदन स्थित नौकरी छोड़कर भारत लौटने के बाद राजनीति में कदम रखा और भारतीय युवा कांग्रेस से जुड़ीं। बाद में 2010 में वह TMC में शामिल हो गईं।
2016 में उन्होंने पश्चिम बंगाल की करीमपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में कृष्णानगर सीट से जीत हासिल कर पहली बार संसद पहुंचीं। दिसंबर 2023 में ‘कैश-फॉर-क्वेरी’ मामले में उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कृष्णानगर सीट से दोबारा जीत दर्ज की और संसद में वापसी की। महुआ मोइत्रा के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर अब उनकी ओर से क्या कानूनी कदम उठाया जाता है और अगली सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है, इस पर नजर रहेगी।