नई दिल्ली: चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार में पार्टी अब तक एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही है. कांग्रेस ने इनमें से 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सभी पर उसे हार का सामना करना पड़ा है. महाराष्ट्र की तीन सीटों पर मतगणना जारी है और कांग्रेस के उम्मीदवार फिलहाल पीछे चल रहे हैं. इन नतीजों ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. खास बात यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार है, इसके बावजूद पार्टी विधान परिषद चुनाव में खाता नहीं खोल सकी. वहीं, बिहार में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है.
बैलेट पेपर पर चुनाव, फिर भी कांग्रेस को नहीं मिली जीत
कांग्रेस लंबे समय से चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग करती रही है. इस बार विधान परिषद की इन सीटों पर बैलेट पेपर से मतदान हुआ, लेकिन पार्टी को इसका कोई चुनावी लाभ नहीं मिला. नतीजों के बाद विरोधी दलों और राजनीतिक हलकों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
बिहार में हार पर कांग्रेस के भीतर उठे सवाल
बिहार में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को लेकर पार्टी के अंदर से भी आवाजें उठने लगी हैं. कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने एबीपी न्यूज से बातचीत में नतीजों पर चिंता जताई और संगठन में जवाबदेही तय करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि बिहार के नतीजे चिंताजनक हैं. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से संगठन की कमियों पर ध्यान देने और जिम्मेदार नेताओं की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया. मनोज कुमार के मुताबिक, चुनाव प्रचार में नेताओं को उचित जिम्मेदारी नहीं दी गई. उन्होंने बताया कि वह खुद अपनी पहल पर सदाकत आश्रम पहुंचे थे, उन्हें वहां किसी ने प्रचार या संगठन से जुड़ा काम नहीं सौंपा था.
अखिलेश प्रसाद सिंह ने उम्मीदवारों के चयन पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर नहीं बताया. उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का चयन बेहतर हो सकता था और कुछ प्रत्याशियों का चुनाव सही नहीं रहा, जिसका असर नतीजों पर पड़ा.
उम्मीदवारों के चयन की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस बारे में संबंधित चुनाव प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ही स्पष्ट जवाब दे सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में जिस तरह की राजनीतिक तैयारी और संगठनात्मक सक्रियता होनी चाहिए थी, वह नजर नहीं आई.
कांग्रेस के सामने संगठन सुधार की चुनौती
चार राज्यों के इन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करने की चुनौती खड़ी कर दी है. खासकर बिहार में पार्टी के नेताओं की ओर से उठाए गए सवाल संकेत देते हैं कि हार के बाद अब संगठन के भीतर समीक्षा की मांग तेज हो सकती है.