जम्मू। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त होने की चौथी वर्षगांठ पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और जम्मू-कश्मीर के अन्य राजनीतिक नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। पीडीपी ने आज 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने की वर्षगांठ के विरोध में शांतिपूर्ण कार्यक्रम को लेकर अनुमति मांगी थी। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति न देने के साथ ही पीडीपी नेताओं के खिलाफ ये कार्रवाई की है।
पीडीपी ने 5 अगस्त को पीडीपी मुख्यालय श्रीनगर के सामने शेर-ए-कश्मीर पार्क में एक शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीसी) श्रीनगर से उचित अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।
साथ ही प्रशासन ने श्रीनगर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का मुख्यालय सील कर दिया है, यहां तक कि किसी भी कर्मचारी को भी कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटे आज शनिवार को पूरे चार साल हो गए हैं। इन चार सालों में धरातल पर आबोहवा बिल्कुल बदल गई है। अब घाटी में बम के धमाकों की आवाज नहीं बल्कि संगीत की स्वरलहरियां गूंजती हैं।
अलगाववादियों के गढ़ डाउन टाउन तथा ऐतिहासिक लाल चौक पर अब शान से तिरंगा लहराता है। घाटी से विलुप्त हो चुकी फिल्म संस्कृति दोबारा जीवंत हो उठी है। शोपियां, पुलवामा, कुलगाम, बारामुला, कुपवाड़ा व श्रीनगर में सिनेमा हॉल खुल गए हैं।
34 साल बाद श्रीनगर की सड़कों पर शिया समुदाय ने मोहर्रम का जुलूस निकाला। इतना ही नहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के एक नुमाइंदे का भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया। 1990 के बाद पहली बार भारी संख्या में कश्मीरी पंडित अपने पूर्वजों का पिंडदान करने 30 जुलाई को अनंतनाग के मट्टन स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर में पहुंचे।