अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। ईरान अब केवल उन्हीं देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिन्हें वह अपना “मित्र राष्ट्र” मानता है। इस तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को तेल से लदे 20 बड़े जहाज भेजे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम “सम्मान के संकेत” के रूप में उठाया गया है। ट्रंप ने बताया कि इन जहाजों की आवाजाही की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगी।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में ईरान 10 जहाज भेजने पर सहमत था, लेकिन बाद में उसने संख्या बढ़ाकर 20 कर दी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अब किसी समझौते के लिए तैयार होता दिख रहा है।
इस बीच, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह एक तरफ ईरान से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई भी जारी है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान के कई अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना व वायुसेना को भारी क्षति हुई है।
ट्रंप ने एक बार फिर 2015 के परमाणु समझौते की आलोचना करते हुए इसे देश के इतिहास का सबसे खराब समझौता बताया। उनका कहना है कि अगर यह समझौता खत्म नहीं किया गया होता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार हो सकते थे। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब एक नए और अधिक सख्त समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जिससे ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके।