नई दिल्ली। पीएम मोदी के United Arab Emirates दौरे के दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अहम समझौता हुआ है। इस डील के तहत यूएई की सरकारी तेल कंपनी Abu Dhabi National Oil Company भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ाएगी।
समझौते के मुताबिक, ADNOC भारत में करीब 30 मिलियन यानी 3 करोड़ बैरल तक कच्चे तेल का भंडारण करेगी। माना जा रहा है कि वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालात में यह भंडार भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत के पास आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए पर्याप्त तेल भंडार उपलब्ध रहेगा।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया की नजर बनी हुई है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। भारत और यूएई ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
ऊर्जा सहयोग केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा। भारत की तेल कंपनी Indian Oil Corporation और ADNOC के बीच एलपीजी आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक समझौते पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा भारत में रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने और एलएनजी सप्लाई को मजबूत बनाने पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। विदेश मंत्रालय ने भी यूएई को भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बताया है।