काठमांडू| नेपाल और तिब्बत से सटे इलाकों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 919 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, अकेले नेपाल में 903 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है। वहीं, 4,200 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सेना, पुलिस और अन्य बचाव दल मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत समेत कई देशों ने नेपाल की मदद के लिए राहत और बचाव सहायता उपलब्ध कराई है।
नेपाल में मृतकों की संख्या 903 पहुंची
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन से देश में मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। करीब 4,227 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि 10,451 लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने की है। कई इलाकों में संचार और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत कार्य भी मुश्किल हो रहा है।
गांवों में खाने-पीने के सामान की कमी
बाढ़ और भूस्खलन ने कई गांवों और बस्तियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। पहाड़ी क्षेत्रों, सुरंगों और दुर्गम स्थानों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। कई प्रभावित गांवों में भोजन और पीने के पानी की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोग कई दिनों से राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन और बचाव दल हेलीकॉप्टरों तथा अन्य माध्यमों से जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं।
अपनों की तलाश में भटक रहे लोग
आपदा के बाद नेपाल से सामने आ रही तस्वीरों ने हालात की भयावहता को उजागर किया है। राहत शिविरों और सेना के कैंपों के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी हासिल करने के लिए पहुंच रहे हैं। कई लोग अपने साथ रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर उनकी तलाश कर रहे हैं। किसी को माता-पिता की चिंता है तो कोई अपने बेटे, भाई या दूसरे रिश्तेदारों की खबर का इंतजार कर रहा है। हजारों परिवारों के लिए अपनों की तलाश अभी भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
बैरियर झील का पानी निकला, टला एक और बड़ा खतरा
इस बीच नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील को लेकर राहत की खबर सामने आई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह प्राकृतिक बहाव के जरिए बाहर निकल चुका है। इसके साथ ही डाउनस्ट्रीम इलाकों में झील के अचानक टूटने से आने वाली संभावित बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।