नई दिल्ली। अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़े सैन्य अभियान को अंजाम दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर वेनेजुएला से बाहर निकाल लिया है। इस ऑपरेशन के दौरान राजधानी काराकास समेत देश के कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना ने रणनीतिक और अहम ठिकानों को निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिशन अमेरिकी सेना की शीर्ष विशेष बल इकाई डेल्टा फोर्स द्वारा अंजाम दिया गया।
क्या है डेल्टा फोर्स?
अमेरिका की डेल्टा फोर्स को दुनिया की सबसे खतरनाक और गोपनीय कमांडो यूनिट्स में गिना जाता है। इसका आधिकारिक नाम 1st Special Forces Operational Detachment–Delta (1st SFOD-D) है। इस यूनिट की स्थापना वर्ष 1977 में अमेरिकी सेना द्वारा की गई थी। डेल्टा फोर्स का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना, बंधक बचाना, दुश्मन के बड़े नेताओं को खत्म करना और ऐसे गुप्त ऑपरेशन अंजाम देना होता है जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह यूनिट सीधे अमेरिकी सेना के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के अंतर्गत काम करती है और इसके ज्यादातर मिशन टॉप सीक्रेट होते हैं।
डेल्टा फोर्स को खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि इसके जवान किसी भी देश, किसी भी माहौल और किसी भी परिस्थिति में ऑपरेशन करने के लिए तैयार रहते हैं। चाहे घनी आबादी वाला शहर हो, दुर्गम पहाड़ी इलाका हो या फिर दुश्मन का सुरक्षित ठिकाना—डेल्टा फोर्स बिना पहचान उजागर किए मिशन पूरा करने में माहिर है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार दुश्मन को यह तक पता नहीं चलता कि हमला किसने किया और ऑपरेशन कब पूरा हो गया।
डेल्टा फोर्स की ट्रेनिंग को दुनिया की सबसे कठिन सैन्य ट्रेनिंग में से एक माना जाता है। इसमें अमेरिकी सेना के पहले से ही सबसे बेहतरीन सैनिकों का चयन किया जाता है। चयन प्रक्रिया के दौरान सैनिकों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ उनकी मानसिक मजबूती की भी कड़ी परीक्षा ली जाती है। लंबे समय तक भूखा रहना, नींद की कमी, अत्यधिक थकान और मानसिक दबाव जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को परखा जाता है। बहुत कम सैनिक इस चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर पाते हैं।
चयन के बाद डेल्टा फोर्स के जवानों को क्लोज क्वार्टर बैटल, बंधक बचाव, स्नाइपर ट्रेनिंग, एडवांस हथियारों के इस्तेमाल, विस्फोटकों की जानकारी और मानसिक नियंत्रण जैसी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा उन्हें विदेशी भाषाएं सीखने, भेष बदलकर आम नागरिकों की तरह रहने और दुश्मन के बीच घुल-मिलकर ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। यही वजह है कि डेल्टा फोर्स के जवान कई बार बिना वर्दी और पहचान के मिशन को अंजाम देते हैं।
डेल्टा फोर्स ने इराक और अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ कई अहम ऑपरेशन किए हैं। अल-कायदा और ISIS जैसे आतंकी संगठनों के बड़े नेताओं को खत्म करने में इस यूनिट की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। हालांकि अमेरिका सरकार इन मिशनों की आधिकारिक पुष्टि बहुत कम करती है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कई हाई-प्रोफाइल एंटी-टेरर ऑपरेशनों के पीछे डेल्टा फोर्स ही रही है। ओसामा बिन लादेन के नेटवर्क को कमजोर करने में भी इस यूनिट की भूमिका बताई जाती है।
डेल्टा फोर्स की सबसे बड़ी ताकत उसकी गोपनीयता है। इसके जवानों की पहचान सार्वजनिक नहीं होती और न ही उनके मिशनों का विवरण तुरंत सामने लाया जाता है। कई ऑपरेशनों की जानकारी दशकों बाद ही सामने आती है। इसी वजह से डेल्टा फोर्स को “शैडो वॉरियर्स” यानी परछाई में लड़ने वाले योद्धा भी कहा जाता है। कुल मिलाकर, डेल्टा फोर्स केवल एक सैन्य यूनिट नहीं बल्कि अमेरिका की सबसे घातक रणनीतिक ताकत मानी जाती है। जब अमेरिका को ऐसा मिशन करना होता है जिसकी नाकामी की कोई गुंजाइश नहीं होती और जिसकी जानकारी दुनिया से छुपाकर रखनी होती है, तब डेल्टा फोर्स को ही मैदान में उतारा जाता है।