नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा है कि इस सैन्य अभियान ने भारतीय वायु शक्ति की मारक क्षमता और रणनीतिक तैयारियों को प्रदर्शित किया। उनके मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर करीब 1200 किलोमीटर के क्षेत्र में और दुश्मन के इलाके के भीतर 200 किलोमीटर तक किए गए सटीक हमलों ने यह दिखाया कि भारतीय वायुसेना जरूरत पड़ने पर दूर तक प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। वायुसेना प्रमुख की यह टिप्पणी पाकिस्तान के संदर्भ में अहम मानी जा रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने वायुसेना के उस दृष्टिकोण को मजबूती दी है, जिसमें अलग-अलग हथियारों और विमानों के बजाय उनकी संयुक्त क्षमता पर ध्यान दिया जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर ने क्या सिखाया?
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, किसी भी सैन्य अभियान में सफलता के लिए केवल आधुनिक हथियार होना पर्याप्त नहीं है। खुफिया जानकारी, सटीक निशाना, विभिन्न प्रणालियों के बीच तालमेल और बदलते हालात के मुताबिक रणनीति में बदलाव करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना ने अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल किया। इससे जरूरत के मुताबिक कार्रवाई करने और संघर्ष को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोकने में मदद मिली। उनका मानना है कि भविष्य के अभियानों में भी सेना को एक ही हथियार या तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्प तैयार रखने होंगे, ताकि दुश्मन की रणनीति बदलने पर तुरंत जवाब दिया जा सके।
‘सफलता मिली, लेकिन क्षमताएं बढ़ाना जरूरी’
वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का मतलब यह नहीं है कि सेना अपनी तैयारियों को लेकर निश्चिंत हो जाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षमताओं को और मजबूत करना तथा उनका विस्तार करना समय की जरूरत है। उनके मुताबिक, भारतीय वायुसेना का लक्ष्य ऐसी ताकत विकसित करना है, जो किसी भी संकट के दौरान तेजी से कार्रवाई कर सके और सटीक तरीके से अपने उद्देश्यों को पूरा करे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तकनीक, हथियार प्रणालियों और सैन्य नेटवर्क को लगातार बेहतर बनाना होगा।
पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान में भारतीय वायुसेना की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि कार्रवाई की सफलता किसी एक विमान या हथियार पर निर्भर नहीं थी, बल्कि कई सैन्य क्षमताओं के समन्वित इस्तेमाल से हासिल हुई। उन्होंने कहा कि सटीक खुफिया सूचनाओं, नेटवर्क आधारित अभियानों, लंबी दूरी से हमला करने वाले हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और वायु रक्षा प्रणालियों ने मिलकर अभियान को प्रभावी बनाया। मानवरहित हवाई प्रणालियों से निपटने की क्षमता भी इस पूरी रणनीति का हिस्सा रही।
स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन रहा प्रभावी
वायुसेना प्रमुख ने स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि कुछ प्रणालियों ने अभियान के दौरान शानदार काम किया। उनके मुताबिक, इन हथियारों ने दुश्मन के इलाके में प्रभावी तरीके से लक्ष्य भेदने की क्षमता दिखाई। उन्होंने इस अभियान में गति, सटीकता और विभिन्न सैन्य प्रणालियों के बीच तालमेल को सफलता के प्रमुख आधारों में शामिल किया। उनका कहना था कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उन्हें एकीकृत तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता निर्णायक साबित होती है।
भविष्य में और तेजी से कार्रवाई करने पर जोर
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर भारतीय वायुसेना अपनी रणनीतिक तैयारियों को आगे बढ़ाती रहेगी। उन्होंने जोर दिया कि जरूरत पड़ने पर वायुसेना पहले से अधिक तेजी, सटीकता और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में सक्षम होनी चाहिए। उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि सैन्य सफलता के बाद भी तैयारी में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। बदलते युद्धक्षेत्र में तकनीक, सटीक हमले, बेहतर समन्वय और रणनीतिक लचीलापन ही भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों के अहम आधार बने रहेंगे।