नई दिल्ली। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद पेपर लीक मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कार्रवाई करते हुए जयपुर से अविनाश लांबा और मनीष यादव को गिरफ्तार किया है। वहीं अब तक करीब 45 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए शेयर किया गया था। मामले के दूसरे राज्यों से जुड़े तार भी खंगाले जा रहे हैं।
SOG की जांच में मनीष यादव का नाम कथित तौर पर नेटवर्क के अहम लोगों में सामने आया है। वहीं CBI की जांच में संजीव मुखिया को इस पूरे मामले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि राजस्थान और बिहार के नेटवर्क के बीच क्या कनेक्शन था।
पटना कनेक्शन भी जांच के दायरे में आ गया है। CBI ने पटना से मनीष प्रकाश और आशुतोष नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 4 मई की रात एक निजी स्कूल में कई परीक्षार्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र याद करवाया गया था। जांच के दौरान बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई को आधे जले हुए प्रश्नपत्र भी मिले थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेपर लीक का स्रोत झारखंड के हजारीबाग स्थित एक परीक्षा केंद्र हो सकता है। वहीं SOG के अधिकारियों ने खुलासा किया है कि परीक्षा से पहले 150 पन्नों का एक कथित ‘गेस पेपर’ तेजी से छात्रों के बीच वायरल हो रहा था। दावा किया जा रहा है कि उसमें शामिल करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे।
पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और सरकार के फैसलों पर टिकी हुई है।