नई दिल्ली। दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की जगहों को लेकर जारी नए आदेश ने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच बहस छेड़ दी है। दिए गए विवरण के मुताबिक, गृह मंत्रालय के निर्देश और दिल्ली पुलिस के नए स्टैंडिंग ऑर्डर L&O/48/2026 के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन के अधिकृत स्थलों की सूची से हटाने का फैसला लिया गया है। अब प्रदर्शन और रैलियों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के स्थल से हटाए जाने के बाद आंदोलन का दायरा दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। दिपके ने कहा, “अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा।” दिए गए विवरण के अनुसार, नए आदेश में दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं और विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित CBD ग्राउंड शामिल हैं। बताया गया है कि इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस अलग से विस्तृत दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर सकती है।
पुराने आदेश में संशोधन
जानकारी के मुताबिक, यह बदलाव 28 अप्रैल 2022 को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक संशोधन के तौर पर किया गया है। आदेश के पीछे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और राजधानी में प्रदर्शनों के संचालन को व्यवस्थित करने का उद्देश्य बताया गया है। हालांकि, आदेश के दायरे, लागू होने की तारीख और प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी विस्तृत शर्तों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज से किया जाना जरूरी है।
CJP ने फैसले पर जताई आपत्ति
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने असहमति जताई। उनके बयान से संकेत मिलता है कि संगठन इस फैसले को विरोध दर्ज कराने की जगह सीमित किए जाने के तौर पर देख रहा है। दिपके ने कहा कि अब जंतर-मंतर को आंदोलन का मैदान बना दिया गया है और देशभर में विरोध की आवाज उठाई जाएगी। इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और राजधानी में विरोध के लिए उपलब्ध स्थानों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।