नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए पुराने साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने में सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में रूस के साथ एक अहम ऊर्जा समझौते की संभावना सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार रूस भारत को सीधे लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो इसे आने वाले कुछ हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है, हालांकि इसमें पश्चिमी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम भी मौजूद हैं।
बताया जा रहा है कि रूसी पक्ष ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इस बातचीत से जुड़े लोगों का कहना है कि एक महीने के भीतर रूस से होने वाला तेल आयात जनवरी के स्तर से दोगुना होकर भारत के कुल आयात का लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने अपने कच्चे तेल पर भारी छूट दी थी, जिसका लाभ उठाते हुए भारत उसके प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। पिछले वर्ष भारत ने रूस से करीब 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा था। इस बढ़ते व्यापार को लेकर अमेरिका के साथ मतभेद भी सामने आए थे।
इस संभावित LNG डील को लेकर विशेषज्ञ अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि भारत ने इस मुद्दे पर पहले ही वॉशिंगटन से संभावित छूट के लिए बातचीत शुरू कर दी है।
वहीं, भारत के विदेश और पेट्रोलियम मंत्रालयों ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संकेत दिया है कि भारत LNG समेत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है।