तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने हालिया चुनाव परिणामों पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उसे हराया गया है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाते हुए इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया को पूरे घटनाक्रम का “मुख्य खलनायक” बताया।
मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसा चुनाव पहले कभी नहीं देखा। उनका आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर करीब 90 लाख वोट काटे गए और भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए हर संभव संसाधनों का इस्तेमाल किया।
इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उनका कहना है कि वह हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें साजिश के तहत हराया गया है। उन्होंने खुद को अब एक आम नागरिक बताते हुए कहा कि उनके पास कोई पद नहीं है, लेकिन वह संघर्ष जारी रखेंगी। ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों, खासकर सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फाॅर्स के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया गया और राज्य के पुलिस अधिकारियों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना केंद्रों पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई और उन्हें धमकाया गया। उनके अनुसार, जब वह खुद मतगणना केंद्र में जाना चाहती थीं तो उन्हें रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए और पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। ममता बनर्जी ने अपने ऊपर हमले का भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें धक्का दिया गया और पेट व पीठ पर मारा गया। उन्होंने कहा कि अगर एक महिला उम्मीदवार के साथ ऐसा हो सकता है, तो अन्य उम्मीदवारों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की निर्मम हत्या” बताते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य के इतिहास का काला दिन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी मुख्यालय पर कब्जे की कोशिश की गई और राज्यभर में अराजक माहौल बनाया गया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी और उचित समय पर अपनी रणनीति का खुलासा करेगी। साथ ही, हार के कारणों की समीक्षा के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं सोनिया गाँधी , राहुल गाँधी , अखिलेश यादव , तेजश्वी यादव , हेमंत सोरेन और अरविन्द केजरीवाल ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है। अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी वापसी करेगी और बीजेपी के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।