कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की विपक्षी एकता की अपील को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस और वाम दलों ने साफ कर दिया है कि वे बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में भी तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी तरह का राजनीतिक गठबंधन नहीं करेंगे।
दरअसल, चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर बीजेपी विरोधी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बीजेपी को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों को साझा मंच पर आना चाहिए। हालांकि, ममता की इस अपील पर कांग्रेस और वाम दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
‘भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक राजनीति से जुड़ी ताकतों को स्वीकार नहीं करेंगे’
CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि वाम दल ऐसे किसी नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेंगे जिसकी पहचान भ्रष्टाचार, उगाही और सांप्रदायिक राजनीति से जुड़ी रही हो। उन्होंने कहा कि वामपंथी दल जनता और हाशिये पर खड़े लोगों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
कांग्रेस बोली- हमें अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सौम्य आइच रॉय ने ममता बनर्जी के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि हमें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय दलों, वामपंथियों और अति-वामपंथियों को साथ आने की बात कही। अगर अति-वामपंथियों से उनका मतलब माओवादी हैं, तो क्या वे उन लोगों की बात कर रही हैं जिन्होंने 2013 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं की हत्या की थी?”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने वर्षों तक कांग्रेस और वाम दलों को खत्म करने की राजनीति की। उन्होंने कहा कि 2016 में जब कांग्रेस और वाम दलों ने गठबंधन किया था, तब TMC ने लगातार उन पर हमला बोला। हालिया चुनाव में भी कांग्रेस और वाम दलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया।
बंगाल में पहली बार BJP की सरकार
गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर पहली बार राज्य में सरकार बनाई है। शनिवार को सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में 15 साल से चला आ रहा TMC का शासन खत्म हो गया।
ममता ने विपक्ष से क्या अपील की थी?
ममता बनर्जी ने अपने वीडियो संदेश में कहा था कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई के लिए सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ वामपंथी और अति-वामपंथी दलों से भी एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अगर कोई भी राजनीतिक दल बातचीत करना चाहता है तो वह इसके लिए तैयार हैं, क्योंकि बीजेपी को रोकना विपक्ष की प्राथमिकता होनी चाहिए।