सोमनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और भव्य रोड शो में भी शामिल हुए। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सोमनाथ मंदिर में पहली बार कुंभाभिषेक अनुष्ठान किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए देश के 11 प्रमुख तीर्थों से पवित्र जल लाया गया था। इनमें गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी समेत कई पवित्र नदियों का जल शामिल रहा।
1.86 टन के विशाल कलश से हुआ अभिषेक
कुंभाभिषेक के लिए करीब 8 फीट ऊंचा और 1.86 टन वजनी विशाल कलश तैयार किया गया। इस कलश को 90 मीटर ऊंची क्रेन की मदद से मंदिर के शिखर तक पहुंचाया गया। शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारियों ने पवित्र जल से अभिषेक किया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।
क्या होता है कुंभाभिषेक?
कुंभाभिषेक हिंदू मंदिरों में होने वाले सबसे पवित्र और दुर्लभ अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। ‘कुंभ’ का अर्थ कलश और ‘अभिषेक’ का अर्थ पवित्र जल से स्नान कराना होता है। यह अनुष्ठान मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने और उसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
कब किया जाता है यह अनुष्ठान?
कुंभाभिषेक आमतौर पर नए मंदिर के निर्माण के बाद प्राण-प्रतिष्ठा के समय किया जाता है। इसके अलावा मंदिर के जीर्णोद्धार, विस्तार या बड़े नवीनीकरण के बाद भी यह अनुष्ठान कराया जाता है। कई परंपराओं में 12 साल के अंतराल पर भी कुंभाभिषेक की परंपरा है। सोमनाथ मंदिर में यह आयोजन मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया।
क्यों खास माना जाता है कुंभाभिषेक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभाभिषेक से मंदिर की दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है। पवित्र नदियों के जल से शिखर और गर्भगृह का अभिषेक करने से मंदिर में नई आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान के बाद भक्तों को अधिक शांति, आशीर्वाद और मनोकामना पूर्ति का फल प्राप्त होता है।