नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लेकर देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। संसद से शुरू हुआ यह विवाद अब सड़कों और राजनीतिक मंचों तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी नेता स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने के मुद्दे पर जश्न जैसा माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं लंबे समय से 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रही थीं, उनके अधिकारों को लेकर विपक्ष का रवैया निराशाजनक रहा।
स्मृति ईरानी ने यह भी कहा कि कांग्रेस यह तंज कस रही है कि बीजेपी के कुछ नेता “मसीहा” बनने की कोशिश कर रहे हैं, जो लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में महिलाओं से जुड़े कई बुनियादी मुद्दों पर पर्याप्त काम नहीं हुआ, जैसे स्वच्छता सुविधाओं की कमी और तीन तलाक जैसे मामलों की मौजूदगी।
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से यह कहना कि महिलाओं का “इस्तेमाल” किया जा रहा है, बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि महिला को किसी भी तरह की “कमोडिटी” नहीं समझा जा सकता। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महिलाएं देश की शक्ति और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक हैं, और बीजेपी इस तरह की सोच की कड़ी निंदा करती है।
इससे पहले कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि केंद्र सरकार जनता को गुमराह करने और सिर्फ प्रचार पर ध्यान देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण जैसे मुद्दों का इस्तेमाल कर रही है और इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियां बनाई जा रही हैं। महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी इस बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है, और अब यह मुद्दा संसद से आगे निकलकर व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।