लखनऊ। स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को फिल्मी गीतों का एक भव्य एवं संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक मंझे हुए गायकों ने अपनी सुरीली आवाज, शानदार गायकी और दिलकश प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सदाबहार हिंदी फिल्मी गीतों की मधुर धुनों के बीच पूरा माहौल संगीतमय हो उठा। सोलो गीतों के साथ-साथ युगल गीतों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कार्यक्रम में पुराने हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतों की ऐसी खूबसूरत छटा देखने को मिली, जिसमें श्रोताओं को संगीत के स्वर्णिम दौर की यादें ताजा हो गईं। हर कलाकार ने अपनी गायकी और अंदाज से कार्यक्रम को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एकल और युगल गीतों की शानदार प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में राकेश श्रीवास्तव जी ने ‘जब मोहब्बत जवां होती है’ गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद अर्चना श्रीवास्तव जी के साथ ‘ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं’ युगल गीत गाकर खूब सराहना बटोरी।
सलीम अब्बासी जी ने वंदना श्रीवास्तव जी के साथ ‘परदेसिया ये सच है पिया’ गीत की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं अनिल सचान जी ने ‘महका-महका रूप तुम्हारा’ गीत सुनाया और वंदना श्रीवास्तव जी के साथ ‘मेहंदी लगा के रखना’ युगल गीत प्रस्तुत किया।
मुकेश श्रीवास्तव जी ने ‘और क्या अहदे वफ़ा होता है’ गीत से समां बांधा। उन्होंने अर्चना जायसवाल जी के साथ ‘दीवाना मस्ताना हुआ दिल’ गीत भी प्रस्तुत किया। अशोक यादव जी ने ‘याद आ रही है, तेरी याद आ रही है’ गीत सुनाया और अर्चना जायसवाल जी के साथ ‘हो गया है मुझको तो प्यार सजना’ गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
प्रेमनाथ पाण्डेय जी ने ‘मैंने शायद तुम्हें पहले भी कहीं देखा है’ तथा ‘टूटे हुए ख्वाबों ने हमको ये सिखाया है’ जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। प्रमोद कुमार श्रीवास्तव जी ने ‘ये दिल मोहब्बत का प्यासा’ गीत सुनाया और प्रीति लाल जी के साथ ‘वो जब याद आए’ युगल गीत प्रस्तुत किया।
अनिल श्रीवास्तव जी ने ‘इक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया’ तथा ‘तुम अगर साथ देने का वादा करो’ गीतों से अपनी गायकी का परिचय दिया। अरविंद मित्तल जी ने ‘तुम अगर साथ देने का’ गीत प्रस्तुत किया और अनीता सिन्हा जी के साथ ‘मुझको अपने गले लगा लो’ युगल गीत गाया।
विजय सक्सेना जी ने ‘चिंगारी कोई भड़के’ और ‘वो शाम कुछ अजीब थी’ गीतों की प्रस्तुति दी। विनय कुमार जी ने ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत’ गीत सुनाया और अनीता सिन्हा जी के साथ ‘इशारों-इशारों में दिल लेने वाले’ युगल गीत प्रस्तुत किया।
राजेन्द्र सिंह जी ने ‘सीने में दिल है, दिल में धड़कन’ गीत गाया। इसके बाद अनीता सिन्हा जी के साथ युगल गीत प्रस्तुत किया और ‘जिसके आने से रंगों में डूब गई है शाम’ गीत भी सुनाया।
अवनीश कौसर जी ने ‘तेरे मेरे बीच में’ गीत प्रस्तुत किया और अर्चना जायसवाल जी के साथ ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ युगल गीत गाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया।
नितिन श्रीवास्तव जी ने ‘तुम्हारी भी जय हो, हमारी भी जय-जय’ गीत प्रस्तुत किया तथा अर्चना श्रीवास्तव जी के साथ ‘सागर किनारे दिल ये पुकारे’ युगल गीत सुनाया।
प्रयागराज से लखनऊ पहुंचकर स्वरलहरी की संगीतमय लहरियों में शामिल हुए हेमंत जी ने ‘मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली’ गीत सुनाया। उन्होंने वंदना श्रीवास्तव जी के साथ ‘कोरा कागज था ये मन मेरा, लिख दिया नाम इस पर तेरा’ युगल गीत भी प्रस्तुत किया।
विनोद वर्मा जी ने ‘थोड़ी सी जो पी ली है’ गीत सुनाया और प्रीति लाल जी के साथ ‘जरा सा झूम लूं मैं’ युगल गीत प्रस्तुत किया। संजय कन्नौजिया जी ने ‘इक न इक दिन कहानी बनेगी’ तथा ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं’ गीतों से श्रोताओं का मनोरंजन किया।
ए. के. श्रीवास्तव जी ने ‘परदे में रहने दो’ गीत प्रस्तुत किया और अर्चना श्रीवास्तव जी के साथ ‘दिल लेने की रुत आई’ युगल गीत गाया। ज्ञानेंद्र कुमार जी ने ‘मुझे इश्क है तुम्हीं से’ गीत सुनाया और वंदना श्रीवास्तव जी के साथ ‘ये आंखें देखकर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं’ युगल गीत प्रस्तुत किया।
शिव वर्मा जी ने ‘कितने सपने, कितने अरमान’ गीत सुनाया और प्रीति लाल जी के साथ ‘जुनली रात मा’ युगल गीत प्रस्तुत किया। सुनील कुमार दुबे जी ने ‘रूप तेरा मस्ताना’ तथा ‘हां, पहली बार’ गीतों से संगीत प्रेमियों का मनोरंजन किया।
फैजल खान जी ने ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार’ गीत प्रस्तुत किया और प्रीति लाल जी के साथ ‘कागज, कलम, दवात ला’ युगल गीत सुनाया। विजय जी ने ‘मेरे नैना सावन भादो’ गीत प्रस्तुत किया, जबकि माधुरी जी ने ‘किसी राह पे, किसी मोड़ पे’ गीत गाया। विजय जी और माधुरी जी की संयुक्त प्रस्तुति ने भी श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
आर. के. गुप्ता जी ने ‘मधुबन में राधिका नाचे रे’ तथा ‘तू गंगा की मौज में जमुना’ जैसे सदाबहार गीत प्रस्तुत किए। महमूद अली जी ने मोहम्मद रफी के लोकप्रिय गीतों का मेडले और ‘परदा है परदा’ गीत सुनाकर संगीत के सुनहरे दौर की यादें ताजा कर दीं।
बीना जी ने ‘तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया’ तथा ‘तुम्हीं मेरी मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा’ गीतों की प्रस्तुति दी। राखी चड्ढा जी ने ‘बांहों में चले आओ’ गीत सुनाया। वहीं रविंद्र श्रीवास्तव जी ने ‘ये जिंदगी की महफिल, महफिल में हम अकेले’ गीत प्रस्तुत कर अपनी गायकी से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
अरविंद मित्तल जी को मिला अर्ली बर्ड सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विशेष आकर्षण के रूप में अर्ली बर्ड पुरस्कार अरविंद मित्तल जी को प्रदान किया गया। इस सम्मान के माध्यम से समय से पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों ने उन्हें सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
आयोजकों ने सभी कलाकारों का किया स्वागत
कार्यक्रम के आयोजक श्री नीलमणि लाल जी और प्रीति लाल जी ने सभी कलाकारों, अतिथियों एवं संगीत प्रेमियों का स्वागत किया और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि संगीत लोगों को आपस में जोड़ने और आपसी प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।
स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप का यह आयोजन संगीत के प्रति समर्पण, कलाकारों की प्रतिभा और सामूहिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बना। सदाबहार फिल्मी गीतों, सुरीली आवाजों और यादगार युगल प्रस्तुतियों से सजी यह संगीतमय शाम उपस्थित लोगों के लिए एक सुखद अनुभव रही। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि संगीत की मिठास उम्र और समय की सीमाओं से परे हर दिल को छूने की क्षमता रखती है।




