मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे के ‘वर्चुअल बकरीद’ वाले बयान को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। आरजेडी और कांग्रेस नेताओं ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने मंगलवार को कहा कि बकरीद और कुर्बानी को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वह संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल समाज में तनाव और नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।
एजाज अहमद ने कहा, “भारत का संविधान सभी धर्मों को अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार त्योहार मनाने की आजादी देता है। लेकिन हर बार बकरीद के मौके पर बीजेपी नेताओं की ओर से इस तरह के बयान दिए जाते हैं, जो माहौल खराब करने वाले होते हैं।”
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने भी नितेश राणे के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और ऐसे समय में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को विकास और जनहित के मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जब देश को स्थिरता और विकास की जरूरत है, तब कुछ नेता विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय सांप्रदायिक बहस खड़ी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
क्या कहा था नितेश राणे ने?
दरअसल, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने बकरीद को लेकर बयान देते हुए कहा था कि जिस तरह होली और दिवाली पर पर्यावरण को लेकर सलाह दी जाती है, उसी तरह बकरीद पर भी ‘वर्चुअल तरीके’ से त्योहार मनाने की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि “एआई के दौर में कंप्यूटर पर बकरे की तस्वीर लगाकर भी बकरीद मनाई जा सकती है।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया है।