महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को 65 वर्षीय भीमराव कांबले को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह अपराध इतना जघन्य है कि उम्रकैद की सजा पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.आर. सालुंके ने सजा सुनाते हुए कहा कि समाज को झकझोर देने वाले इस अपराध के लिए कानून में उपलब्ध सबसे कठोर दंड दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह की घटना मानवता को शर्मसार करती है।
सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्ची के परिजन अदालत में मौजूद रहे। मामले की जांच और सुनवाई बेहद तेज गति से पूरी की गई। घटना के करीब एक महीने के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर दोषसिद्धि और सजा तक की प्रक्रिया पूरी हो गई।
यह मामला मई 2026 का है, जब पुणे जिले के भोर तालुका स्थित नसरपुर इलाके में बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। बाद में बच्ची मृत अवस्था में मिली थी। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी की पहचान हुई थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपी के भीतर अपने अपराध को लेकर कोई पछतावा दिखाई नहीं दिया। सरकारी वकील ने अदालत से इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला मानते हुए फांसी की सजा देने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
इस फैसले के बाद इलाके में लोगों ने संतोष जताया है। वहीं, बच्ची के परिवार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस फैसले से समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा।