अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच लगातार गहराती जा रही है। गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) एक बार फिर अयोध्या पहुंचा और ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों से कई घंटों तक पूछताछ की। जांच टीम ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव से चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर सवाल किए।
सूत्रों के मुताबिक, SIT ने मंदिर चढ़ावे के ऑडिट से जुड़े कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। जांच टीम ने पिछले वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि कुछ जरूरी दस्तावेज अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
पांच साल के रिकॉर्ड खंगाल रही SIT
6 जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद 13 जून को SIT का गठन किया गया था। जांच दल अपनी शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप चुका है। अब दूसरे चरण की जांच में ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय लेनदेन और ऑडिट रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चढ़ावे के प्रबंधन में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं और क्या इसमें किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी शामिल थी।
पूछताछ में आरोप-प्रत्यारोप
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने खुद को किसी भी अनियमितता से अलग बताया। तीनों ने कथित तौर पर मामले में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वहीं पुलिस की एक टीम आरोपी अविनाश शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित गांव भी पहुंची। टीम ने परिजनों से पूछताछ की और कुछ दस्तावेज जब्त किए।
इस्तीफे के बाद एकांत में हैं चंपत राय
चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों के मुताबिक, वह फिलहाल सार्वजनिक गतिविधियों से दूर हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि जिन लोगों पर उन्होंने भरोसा किया, उन्हीं ने उन्हें धोखा दिया।
बार एसोसिएशन ने भी उठाई कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर अयोध्या बार एसोसिएशन ने भी मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को एसोसिएशन की ओर से थाने में एक शिकायत दी गई, जिसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत को जनरल डायरी में दर्ज कर लिया है, हालांकि अब तक औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।