कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी में सोमवार को हुए धमाके में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे की जांच के दौरान फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखों के भंडारण की बात सामने आई है। प्रशासन के मुताबिक, फैक्ट्री का लाइसेंस करीब दो साल पहले ही निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद यहां पटाखों का भंडारण किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया है कि अवैध गतिविधियों की शिकायत पहले की गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। मामले में पुलिस की भूमिका और लापरवाही की भी जांच की गई।
7 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद पुलिस विभाग ने भी कार्रवाई की है। आईजी अजय कुमार मिश्रा के मुताबिक, मामले में लापरवाही के आरोप में सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर शिवचरण राम, सब-इंस्पेक्टर विकास सिंह, विनय सिंह, अजीत कुमार सिंह, अभिषेक गुप्ता, मनीष पाल और अमित द्विवेदी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
मुख्य आरोपी नौशाद मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
विस्फोट के मामले में पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मंगलवार तड़के मुख्य आरोपी नौशाद की पुलिस से मुठभेड़ हो गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की तलाश में टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। बताया गया कि सुबह करीब चार बजे पुलिस टीम को सूचना मिली कि नौशाद चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास से निकलने की कोशिश कर रहा है। पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की। पुलिस का दावा है कि खुद को घिरा देखकर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर विस्फोट से जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। मामले में दो महिलाओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
लाइसेंस रद्द होने के बावजूद चल रहा था पटाखों का कारोबार
जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। प्रशासन के अनुसार इसका लाइसेंस दो साल पहले रद्द हो चुका था। इसके बावजूद परिसर में पटाखों का भंडारण किया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायतों और स्थानीय स्तर पर हुई लापरवाही को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंध और लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद फैक्ट्री में पटाखों का भंडारण कैसे जारी रहा और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
मृतकों के परिजनों को 2 लाख, घायलों को 50 हजार
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि हादसे की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस विस्फोट के कारणों के साथ-साथ अवैध पटाखा भंडारण और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।