ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद नोएडा अथॉरिटी लगातार चर्चा में बनी हुई है. इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी बेनकाब कर दिया. अब इसी मामले से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है.
युवराज मेहता की मौत के बाद बढ़ते जन आक्रोश और सवालों के घेरे में आई नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को उनके पद से हटा दिया गया था. सरकार ने अब इस अहम पद पर नए अधिकारी की नियुक्ति कर दी है. आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश ने नोएडा अथॉरिटी के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है.
युवराज मेहता की कार ग्रेटर नोएडा में एक खुले नाले में गिर गई थी. बताया गया कि घंटों तक उसे कोई मदद नहीं मिल सकी, जिसके चलते उसकी जान चली गई. इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नोएडा विकास प्राधिकरण पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. मामला तूल पकड़ता गया और अंततः सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा.
कौन हैं नए CEO कृष्णा करुणेश
कृष्णा करुणेश वर्ष 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले करुणेश उत्तर प्रदेश कैडर में अपनी तेज़ और सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. जून 2022 में वे गोरखपुर के जिलाधिकारी बनाए गए थे, जहां उन्होंने कई अहम फैसलों के जरिए प्रशासनिक सुधारों को लागू किया.
अपने अब तक के करियर में कृष्णा करुणेश कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. वे गाजियाबाद में उप-जिलाधिकारी (SDM) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर रह चुके हैं. इसके अलावा हापुड़ और बलरामपुर जैसे जिलों में भी उन्होंने जिलाधिकारी के रूप में काम किया है. विकास कार्यों में तेजी लाना और सिस्टम को जवाबदेह बनाना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है.
शैक्षणिक रूप से भी कृष्णा करुणेश मजबूत पृष्ठभूमि रखते हैं. उन्होंने एमए (MA) के साथ-साथ एलएलबी (LLB) की पढ़ाई भी की है. कानून और प्रशासन दोनों की गहरी समझ के कारण वे जमीनी स्तर पर सख्त लेकिन व्यावहारिक फैसले लेने वाले अधिकारी माने जाते हैं.
नोएडा अथॉरिटी के नए सीईओ के रूप में कृष्णा करुणेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का भरोसा दोबारा कायम करना है. युवराज मेहता हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और जवाबदेही पर उठे सवालों के बीच उनसे ठोस और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है. अब देखना होगा कि उनके नेतृत्व में नोएडा और ग्रेटर नोएडा की प्रशासनिक तस्वीर कितनी बदलती है.