अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को होने वाली अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, विश्व हिंदू परिषद और अयोध्या के कई संत-महात्मा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ट्रस्ट के नए महासचिव के तौर पर देखना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के कई सदस्यों के बीच उनके नाम को लेकर सहमति भी बन चुकी है। हालांकि, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती इस जिम्मेदारी को लेने के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, स्वामी वासुदेवानंद का मानना है कि हालिया विवादों के कारण ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और वे इस स्थिति में महासचिव का पद स्वीकार नहीं करना चाहते। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करीबी लोगों से भी इस संबंध में अनिच्छा जाहिर की है।
राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार में प्रभावशाली संतों में गिने जाते हैं। वह लंबे समय तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद से जुड़े रहे हैं, हालांकि इसको लेकर कानूनी विवाद अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
करीबी सूत्रों का दावा है कि स्वामी वासुदेवानंद मंदिर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब ट्रस्ट की जिम्मेदारियों से भी दूरी बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि वे राम मंदिर निर्माण के उद्देश्य से ट्रस्ट से जुड़े थे और अब उस कार्य का प्रमुख हिस्सा पूरा हो चुका है।
इसी वजह से माना जा रहा है कि सोमवार की बैठक में नए महासचिव के नाम पर अंतिम फैसला होना मुश्किल है। ट्रस्ट के कुछ सदस्य फिलहाल इस मुद्दे को टालने और बाद में आम सहमति बनने के बाद नए नाम की घोषणा करने के पक्ष में हैं।
राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवादों के बीच ट्रस्ट की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में ट्रस्ट की छवि और भविष्य की रणनीति को लेकर भी चर्चा हो सकती है।