नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर संसद में ऐसा बयान दिया, जिस पर देश की राजनीति गरमा गई है। प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर अतिक्रमण केवल एकतरफा नहीं हुआ है, बल्कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह बात सुनकर आपको हैरानी हो सकती है। मुझे भी हाल ही में इसकी जानकारी मिली है। अतिक्रमण सिर्फ भारत की ओर से नहीं हुआ, नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर अतिक्रमण किया है।”
हालांकि, उन्होंने संसद में उन स्थानों का नाम नहीं बताया जहां कथित तौर पर नेपाल द्वारा अतिक्रमण किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद सीमा संबंधी मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा और राजनयिक स्तर पर चर्चा कर स्थायी समाधान निकाला जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि लिपुलेख और लिम्पियाधुरा से जुड़े मुद्दों पर नेपाल द्वारा भेजे गए राजनयिक नोट्स का जवाब भारत की ओर से मिल चुका है।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद संसद में विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने बयान को संवेदनशील और आपत्तिजनक बताते हुए सरकार से इसके समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि सीमा जैसे कूटनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बिना प्रमाण के बयान देना उचित नहीं है। पार्टी ने मांग की कि यदि सरकार अपने दावे को साबित नहीं कर पाती है तो इस बयान को संसद की कार्यवाही से हटाया जाए।
हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत द्वारा घोषित नए मार्ग को लेकर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी। नेपाल का दावा है कि लिपुलेख क्षेत्र उसका हिस्सा है, जबकि भारत इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। इस बीच नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष Rabi Lamichhane 1 से 5 जून तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान उनके प्रधानमंत्री Narendra Modi समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने की संभावना है। ऐसे समय में यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।