भोपाल, 4 अक्टूबर 2026। भारत में शहरों को क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी और स्मार्ट सिटी जैसे मानकों पर विकसित करने की बात होती रही है। अब इसी कड़ी में एक नया सवाल सामने आया है—क्या भारत में ऐसे शहर भी हो सकते हैं, जिन्हें Pet Friendly City के तौर पर पहचाना जाए?

इसी सोच के साथ वर्ष 2022 में शुरू हुई Pet Friendly City पहल अब सिटी-लेवल मूवमेंट के रूप में आगे बढ़ रही है। इस पहल के तहत भोपाल को पायलट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पेट-फ्रेंडली जगहें तैयार करना या पशुओं के प्रति जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि यह समझ विकसित करना है कि किसी शहर को वास्तव में पशु-अनुकूल बनाने के लिए किन सुविधाओं और प्रयासों की जरूरत है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जागरूकता की शुरुआत
पहल के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से Animal Welfare, Responsible Pet Ownership, Animal Safety और Human-Animal Coexistence जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया। सकारात्मक और जानकारीपरक कंटेंट के जरिए इस विचार को पेट पैरेंट्स के साथ-साथ आम नागरिकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

सेमिनार और वर्कशॉप के जरिए ग्राउंड कनेक्ट
डिजिटल अभियान के साथ-साथ कॉलेजों, बाजारों और शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सेमिनार, वर्कशॉप, स्टूडेंट इंटरैक्शन और सिटीजन एंगेजमेंट गतिविधियां आयोजित की गईं। इसका उद्देश्य लोगों को अभियान से जोड़ने के साथ-साथ यह समझना भी रहा कि शहर में पशुओं से जुड़े किन मुद्दों का सामना नागरिकों को करना पड़ता है।

पब्लिक लीडरशिप और स्टेकहोल्डर्स को जोड़ने की कोशिश
अभियान के अगले चरण में पब्लिक ओपिनियन, पॉलिसी और शहर से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने वाले इन्फ्लुएंसर्स, प्रोफेशनल्स, संस्थाओं और अन्य स्टेकहोल्डर्स को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। पहल का लक्ष्य इसे किसी एक संस्था तक सीमित रखने के बजाय एक सामूहिक नागरिक आंदोलन के रूप में विकसित करना है।

क्या होती है Pet Friendly City?
पेट फ्रेंडली सिटी के मुताबिक किसी शहर को केवल पेट-फ्रेंडली कैफे, पार्क या बिजनेस होने के आधार पर Pet Friendly City नहीं कहा जा सकता। इसके लिए कई बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
Animal Safety: जानवरों के लिए सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त वातावरण।
Healthcare & Vaccination: पशुओं के लिए वेटरिनरी केयर, इमरजेंसी सपोर्ट और वैक्सीनेशन की सुविधा।
Food, Water & Nutrition: जानवरों के लिए भोजन, स्वच्छ पानी और जिम्मेदार फीडिंग को लेकर जागरूकता।
Pet-Friendly Spaces: ऐसे सार्वजनिक और निजी स्थान, जहां इंसान और पालतू जानवर सुरक्षित तरीके से साथ रह सकें।
Responsible Pet Ownership: पेट पैरेंट्स और आम नागरिकों में जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना।

‘यह केवल सरकार या NGOs की जिम्मेदारी नहीं’
Pet Friendly City के फाउंडर विपिन त्रिपाठी का कहना है कि जिस तरह कोई शहर तब स्वच्छ बनता है जब लोगों में अपने शहर को साफ रखने की भावना पैदा होती है, उसी तरह कोई शहर वास्तव में पेट फ्रेंडली भी तभी बनेगा, जब नागरिक इसे अपनी जिम्मेदारी समझें। इसे केवल सरकार, एनजीओ या पेट पैरेंट्स के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

PetFriendlyCity.in पर ‘Help for Pets’ सेक्शन
इसी सोच को व्यावहारिक रूप देने के लिए PetFriendlyCity.in को एक डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। प्लेटफॉर्म पर ‘Help for Pets’ नाम से एक सेक्शन भी तैयार किया गया है, जहां घायल जानवरों, खोए हुए पालतू जानवरों, एनिमल रेस्क्यू और अन्य आपात स्थितियों में उपयोगी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

भोपाल के बाद दूसरे शहरों तक पहुंचाने की तैयारी
आने वाले समय में भोपाल के पायलट अनुभव के आधार पर इस मॉडल को देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा पशु बचाव, फीडिंग, हेल्थकेयर और एनिमल वेलफेयर के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को सम्मानित करने के लिए Pet Friendly City Summit & Awards की भी योजना है। World Animal Day 2026 के मौके पर Pet Friendly City ने इसी सवाल को एक बार फिर सामने रखा है भारत में Clean City है, Green City है, Smart City है… लेकिन India की Pet Friendly City कहाँ है?
