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37 साल CISF में देश सेवा के बाद समाज सेवा की राह पर पवन कुमार शर्मा

न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल

देश की सुरक्षा में लगभग 37 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद समाज के लिए सक्रिय रहना किसी भी व्यक्ति की जीवन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। मोदीनगर निवासी पवन कुमार शर्मा ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में लंबे समय तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति के उपरांत एक्यूप्रेशर तकनीक सीखने और लोगों को स्वास्थ्य तथा जीवनशैली के प्रति जागरूक करने की दिशा में काम करना शुरू किया।

बीकॉम और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त करने वाले पवन कुमार शर्मा ने वर्ष 1987 में CISF में सब-इंस्पेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। वर्ष 2000 में इंस्पेक्टर और वर्ष 2010 में असिस्टेंट कमांडेंट बने। वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने समय और अनुभव का उपयोग समाज के लिए करने का निर्णय लिया।

उनके अनुसार, सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई लोगों को कमर, गर्दन और घुटनों में दर्द जैसी समस्याओं से परेशान देखा। इसी अनुभव ने उन्हें एक्यूप्रेशर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एक अनुभवी व्यक्ति से इस तकनीक का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने लोगों को एक्यूप्रेशर के बारे में जानकारी देने और अपने अनुभव के आधार पर उनकी सहायता करने का प्रयास शुरू किया।

न्यूज जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल के साथ इस विशेष बातचीत में पवन कुमार शर्मा ने अपनी जीवन यात्रा, CISF में मिले अनुशासन, एक्यूप्रेशर सीखने की प्रेरणा, प्राकृतिक जीवनशैली और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर विचार साझा किए।

प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश

CISF में लंबे समय तक देश की सेवा करने के बाद एक्यूप्रेशर की ओर आने की प्रेरणा कहां से मिली?

अपने सेवाकाल के दौरान मैंने कई लोगों को कमर, घुटनों और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द से परेशान देखा। इसी दौरान मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिन्हें एक्यूप्रेशर तकनीक का अनुभव था। मैंने उनसे संपर्क किया और लगभग एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने अपने करीब 20 वर्षों के अनुभव को मेरे साथ साझा किया। इसके बाद इस तकनीक में मेरी रुचि बढ़ी। मैं पिछले कुछ वर्षों से अपने परिचितों और जरूरतमंद लोगों को इसके बारे में जानकारी देने तथा अपनी समझ के अनुसार उनकी सहायता करने का प्रयास कर रहा हूं।

आम लोगों के लिए एक्यूप्रेशर को आसान शब्दों में कैसे समझाएंगे?

एक्यूप्रेशर में शरीर के कुछ विशेष बिंदुओं पर दबाव दिया जाता है। इसमें संबंधित बिंदुओं की पहचान और तकनीक का सही ज्ञान महत्वपूर्ण होता है। मैंने इस पद्धति को सीखा है और अपने अनुभव के आधार पर लोगों की सहायता करने का प्रयास करता हूं।

आज कमर, गर्दन और घुटनों के दर्द जैसी समस्याओं के संदर्भ में जीवनशैली की क्या भूमिका है?

आज लोगों की दिनचर्या काफी व्यस्त हो गई है। कई लोग लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करते हैं और शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। मेरा मानना है कि हमें अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए, नियमित शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना चाहिए। शरीर में लगातार दर्द या परेशानी होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई से लेकर CISF में असिस्टेंट कमांडेंट बनने तक के सफर ने आपको क्या सिखाया?

मैंने बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद लगभग दो साल तक वकालत भी की। इसके बाद CISF में मेरा चयन हुआ और मैंने देश की सुरक्षा के लिए सेवाएं शुरू कीं। सुरक्षा बल में काम करने से अनुशासन, जिम्मेदारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण जैसे गुण जीवन का हिस्सा बने। सेवानिवृत्ति के बाद भी यही विचार रहा कि अपने समय और अनुभव का उपयोग समाज की सहायता के लिए किया जाए।

शरीर की देखभाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता को समझे। व्यायाम अपनी उम्र और शारीरिक स्थिति के अनुसार करना चाहिए। क्षमता से अधिक वजन उठाने या शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना भी महत्वपूर्ण है।

लोगों की सहायता करने से आपको किस तरह की संतुष्टि मिलती है?

मेरे पास अलग-अलग तरह की परेशानियों से जूझ रहे लोग आते हैं। कोई सिरदर्द की बात करता है, तो कोई कमर, कंधे, गर्दन या घुटनों में दर्द की शिकायत करता है। मैं उनकी परेशानी सुनकर अपनी जानकारी के अनुसार सहायता करने का प्रयास करता हूं। जब कोई व्यक्ति अपने अनुभव के बारे में बताता है, तो मुझे खुशी होती है। मेरा मानना है कि लोगों को अपनी शारीरिक स्थिति के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

आज के युवाओं के लिए मोबाइल के इस्तेमाल और नियमित दिनचर्या को लेकर आपका क्या संदेश है?

मोबाइल आज हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका इस्तेमाल संतुलित तरीके से करना चाहिए। लगातार मोबाइल चलाने के बजाय बीच-बीच में विराम लेना, शारीरिक गतिविधियां करना और दिनचर्या व्यवस्थित रखना जरूरी है। पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए। छोटी-छोटी अच्छी आदतें जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

आपके पिता स्वर्गीय श्री कैलाश चंद्र शर्मा के संस्कारों ने आपके जीवन को किस तरह प्रभावित किया?

मेरे पिता ने जीवन में बहुत संघर्ष किया। कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने परिवार को आगे बढ़ाया। उनके जीवन से मैंने बहुत कुछ सीखा। मेरे मन में हमेशा यह विचार रहा कि अपनी जानकारी और अनुभव के माध्यम से जहां संभव हो, लोगों की सहायता की जाए। दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना और जरूरतमंद लोगों के काम आना मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक जीवनशैली, खानपान और सकारात्मक सोच को आप कितना महत्वपूर्ण मानते हैं?

मेरा मानना है कि जीवनशैली का हमारी दिनचर्या पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सकारात्मक सोच, संतुलित और सात्विक खानपान, पर्याप्त नींद तथा नियमित शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। व्यक्ति को अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार दिनचर्या अपनानी चाहिए। प्राकृतिक जीवनशैली के प्रति जागरूक रहना और अच्छी आदतों को अपनाना भी महत्वपूर्ण है।

सेवानिवृत्ति के बाद आपने समाज के लिए सक्रिय रहने का निर्णय क्यों लिया?

नौकरी के दौरान मैंने लंबे समय तक देश की सेवा की। सेवानिवृत्ति के बाद मैंने सोचा कि अब अपने समय और अनुभव का उपयोग समाज के लिए किस तरह किया जा सकता है। इसी सोच के साथ मैंने एक्यूप्रेशर तकनीक सीखी और लोगों को इसके बारे में जानकारी देना शुरू किया। मेरा प्रयास है कि अपनी जानकारी के माध्यम से लोगों की सहायता कर सकूं और उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित कर सकूं।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए किन आदतों को अपनाना जरूरी है?

व्यवस्थित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियों का ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना भी उपयोगी है।

अंत में, स्वस्थ और अनुशासित जीवन शुरू करने वाले लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

मैं यही कहना चाहूंगा कि अपने जीवन को व्यवस्थित बनाइए और अनुशासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। समय पर सोना, समय पर उठना, संतुलित भोजन करना और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधियां करना महत्वपूर्ण है। अपने शरीर के प्रति जागरूक रहिए, अच्छी आदतों को अपनाइए और जहां तक संभव हो, दूसरों के काम आइए। स्वस्थ रहिए, मस्त रहिए।

देश सेवा से समाज सेवा तक का सफर

पवन कुमार शर्मा की जीवन यात्रा CISF में लंबे समय तक सेवा देने के बाद समाज के लिए सक्रिय रहने की सोच को सामने लाती है। सुरक्षा बल में मिली जिम्मेदारी और अनुशासन के अनुभवों के बाद उन्होंने एक्यूप्रेशर तकनीक सीखने तथा लोगों को स्वास्थ्य और जीवनशैली के प्रति जागरूक करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

इस बातचीत में उन्होंने अनुशासित दिनचर्या, संतुलित खानपान, सकारात्मक सोच और लोगों की सहायता करने के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उनकी यात्रा यह भी दर्शाती है कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति अपने अनुभवों का उपयोग समाज के लिए नए तरीके से कर सकता है।

विशेष बातचीत: न्यूज जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल

डिस्क्लेमर: इस लेख में एक्यूप्रेशर, खानपान और जीवनशैली से संबंधित विचार संबंधित व्यक्ति के अनुभवों एवं कथनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी बीमारी के निदान, उपचार या स्थायी राहत की गारंटी न माना जाए। किसी भी बीमारी, दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए योग्य चिकित्सक या संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। चिकित्सकीय सलाह के बिना निर्धारित उपचार बंद न करें और न ही उसमें बदलाव करें।

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