कोलकाता। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और टीएमसी पर निशाना साधे जाने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर केंद्र सरकार की मंशा और समय पर सवाल उठाए।
‘महिला प्रतिनिधित्व पर टीएमसी का रिकॉर्ड बेहतर’
ममता बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में महिला प्रतिनिधित्व देश के अन्य दलों की तुलना में अधिक है। उनके अनुसार लोकसभा में टीएमसी के लगभग 38 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा करीब 46 प्रतिशत तक पहुंचता है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी कभी भी महिला आरक्षण का विरोधी नहीं रही।
परिसीमन को लेकर उठाए गंभीर सवाल
सीएम ममता ने केंद्र सरकार की परिसीमन (डीलिमिटेशन) प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के मुद्दे को आगे रखकर कुछ राज्यों के राजनीतिक हित साधने का प्रयास कर रही है, जिसका उनकी पार्टी विरोध कर रही है।
ममता ने यह भी कहा कि परिसीमन और संविधान में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर वह गंभीर चिंता जताती हैं, क्योंकि इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर इतनी गंभीरता थी, तो इसे लागू करने में वर्षों की देरी क्यों हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इसे ऐसे समय में क्यों आगे बढ़ाया गया जब कई राज्यों में चुनावी माहौल है।
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पीएम को संसद में आकर जवाबदेही के साथ बात करनी चाहिए थी, न कि सार्वजनिक मंच से राजनीतिक आरोप लगाने चाहिए। उन्होंने इसे “पारदर्शिता से बचने की कोशिश” बताया और सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। टीएमसी प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार खड़ी रही है और आगे भी रहेगी, लेकिन राजनीतिक भाषणबाजी के जरिए उन्हें निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।