उत्तर प्रदेश के इतिहास में 28 मार्च 2026 का दिन एक अहम उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Noida International Airport का उद्घाटन किया। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट का शुभारंभ नहीं, बल्कि करीब 25 साल लंबे संघर्ष, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और करोड़ों लोगों की उम्मीदों के साकार होने की कहानी है। जो परियोजना कभी फाइलों में अटकी थी, आज वह एशिया के आधुनिक विमानन केंद्रों में अपनी जगह बना चुकी है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत साल 2001 में हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री Rajnath Singh ने क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, इसके बाद लंबे समय तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। साल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Mayawati ने इस परियोजना को दोबारा गति दी और रक्षा मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी हासिल की।
साल 2012 में यह परियोजना एक बड़े विवाद में फंस गई, जब केंद्र की यूपीए सरकार ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कम दूरी का हवाला देकर इसे रोक दिया। इसके बाद 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने इसे जेवर से आगरा शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा, ताकि दूरी से जुड़ी शर्त पूरी हो सके। हालांकि, 2014 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद यह परियोजना फिर से अपने मूल स्थान जेवर लौट आई।
वास्तविक काम की शुरुआत 6 जुलाई 2017 से मानी जाती है, जब निर्माण के लिए मंजूरी मिली। इसके बाद जमीन अधिग्रहण, सामाजिक प्रभाव आकलन और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। 25 मई 2019 से किसानों को मुआवजा वितरण शुरू हुआ और अगस्त 2019 तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई। 29 नवंबर 2019 को Zurich Airport International AG ने सबसे ऊंची बोली लगाकर इस परियोजना का ठेका हासिल किया। इसके बाद 25 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में एयरपोर्ट का शिलान्यास किया, जिससे निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली।
अंतिम चरण में 9 दिसंबर 2024 को रनवे पर पहली बार विमान का सफल ट्रायल किया गया। इसके बाद मार्च 2026 की शुरुआत में नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो से सुरक्षा मंजूरी मिली और 6 मार्च 2026 को अंतिम एयरोड्रम लाइसेंस जारी किया गया। इसके साथ ही 28 मार्च 2026 को यह बहुप्रतीक्षित परियोजना देश को समर्पित कर दी गई।