लखनऊ, 27 सितंबर 2026। विज्ञान भारती, अवध प्रांत की तृतीय वार्षिक साधारण सभा रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के आर.के. मुखर्जी सभागार में सम्पन्न हुई। सभा में अवध प्रांत के लगभग 120 आजीवन सदस्यों ने सहभागिता की। इस अवसर पर नई कार्यकारिणी का गठन करते हुए राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी, रायबरेली के कुलपति प्रो. बी.एन. सिंह को अध्यक्ष तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रो. विनय सिंह को महासचिव निर्वाचित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आगमन के पश्चात दीप प्रज्वलन एवं विज्ञान भारती मंत्र के साथ हुआ। अध्यक्ष के स्वागत उद्बोधन के बाद विगत वार्षिक साधारण सभा से 31 मार्च 2026 तक अवध प्रांत द्वारा संचालित विभिन्न वैज्ञानिक, शैक्षणिक, विद्यार्थी एवं संगठनात्मक गतिविधियों का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। सभा में आय-व्यय एवं लेखा-जोखा भी रखा गया तथा आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। नई कार्यकारिणी के गठन के लिए निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद इसकी औपचारिक घोषणा की गई। इसके तहत प्रो. बी.एन. सिंह और प्रो. विनय सिंह को क्रमशः अध्यक्ष एवं महासचिव निर्वाचित किया गया।
अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री स्वांत रंजन ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी एवं उपस्थित कार्यकर्ताओं को आशीर्वचन और मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विज्ञान भारती के कार्य को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने, वैज्ञानिक चेतना तथा स्वदेशी विज्ञान दृष्टि को बढ़ावा देने और भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय की दिशा में निरंतर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने वाल्मीकि रामायण में वर्णित हनुमान जी के चार गुणों—धैर्य, दृष्टि, मति और दक्षता—से प्रेरणा लेने की बात कही।
विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार ने विज्ञान को समाज एवं राष्ट्र की आवश्यकताओं से जोड़ने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापक स्तर पर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और समाज के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से सामाजिक आवश्यकताओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
क्षेत्र सह-प्रचार प्रमुख श्री मनोज कान्त ने भारतीय पारंपरिक एवं औषधीय ज्ञान को आधुनिक शोध के आयामों से जोड़कर नागरिकों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में उपलब्ध ज्ञान और अनुभवों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि उसे समकालीन समाज के लिए उपयोगी बनाया जा सके।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रो. बी.एन. सिंह ने कहा कि अवध प्रांत के कार्यकर्ताओं एवं आजीवन सदस्यों की विशेषज्ञता, रुचि और विशेष कौशल को ध्यान में रखते हुए उन्हें उपयुक्त दायित्व सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की क्षमता एवं विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी दिए जाने से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ता है तथा संगठन की कार्यक्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
नवनिर्वाचित महासचिव प्रो. विनय सिंह ने कहा कि विज्ञान भारती के मूल उद्देश्यों एवं विचारधारा के अनुरूप अवध प्रांत में विभिन्न आयामों की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा समाज के विभिन्न वर्गों को विज्ञान भारती की गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
सभा में आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इसमें संगठन के विस्तार, अधिकाधिक विद्यार्थियों एवं युवाओं को विज्ञान की गतिविधियों से जोड़ने, विभिन्न वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्क बढ़ाने तथा विज्ञान भारती के विभिन्न आयामों की गतिविधियों को अवध प्रांत के अधिकाधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विचार किया गया।विज्ञान भारती, अवध प्रांत की नई कार्यकारिणी ने संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा वैज्ञानिक चेतना एवं विज्ञान-संस्कृति को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतिका ने किया।