उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमान अब नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे। ओवैसी ने अपने संबोधन में मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे आने और नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
‘अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, नेता बनेगा’
रविवार को रामपुर में आयोजित जनसभा में ओवैसी हरे रंग की पगड़ी पहने नजर आए। सभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत दूसरी राजनीतिक पार्टियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के युवाओं में भी दूसरे समुदायों की तरह नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते।
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम युवाओं को राजनीति में अपनी पहचान बनाने का मंच दे रही है। उन्होंने युवाओं से देश की सेवा करने और वंचित लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे आने की अपील की। AIMIM प्रमुख ने अपने भाषण में पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब्दुल को केवल सभाओं में दरी बिछाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लोगों को भी नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए और वे विधायक तथा सांसद बनकर अपनी भूमिका निभाएं।
मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे आने का संदेश
ओवैसी ने कहा कि उनकी सभाओं में मौजूद युवा लड़के-लड़कियों को आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें उचित मंच और अवसर देने की है। उन्होंने कहा कि AIMIM ऐसे युवाओं को आगे लाना चाहती है, जो राजनीति में सक्रिय होकर देश की सेवा कर सकें और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें।
अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना
अपने संबोधन में असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘कुछ देर की खामोशी है, फिर शोर आएगा। अखिलेश-बाबा तुम्हारा वक्त आया है, हमारा दौर आएगा।’ ओवैसी के इस बयान को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी सभा और भाषण ने प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक नेतृत्व और मुस्लिम समाज की भागीदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।