राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले को लेकर अब धार्मिक जगत से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। आध्यात्मिक वक्ता करपात्री महाराज ने एफआईआर और एसआईटी जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अब तक की कार्रवाई अधूरी दिखाई देती है और मामले के बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंची है।
मीडिया से बातचीत में करपात्री महाराज ने कहा कि यदि किसी संगठन के भीतर गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है, तो जांच केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके मुताबिक, मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है ताकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई में छोटे स्तर के कर्मचारियों और सीमित लोगों को ही निशाने पर लिया गया है, जबकि कथित तौर पर प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की गहराई से जांच नहीं की जा रही। उनका कहना है कि यदि जांच इसी तरह सीमित दायरे में रही, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
करपात्री महाराज ने योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जाए और किसी भी आरोपी को प्रभाव या पद के आधार पर राहत न मिले। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक संबंधित जिम्मेदारियों से अलग किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार जनता का विश्वास बनाए रखना चाहती है, तो मामले में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है।